केंद्र सरकार का बड़ा फैसला और राहत की घोषणा
त्यौहारी सीजन के ठीक पहले देश के आम नागरिकों और गृहिणियों को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने कच्चे (Crude) और रिफाइंड पाम तेल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी (Sunflower) तेल पर लगने वाली बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (BCD - बुनियादी आयात शुल्क) को घटाने की औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार के इस दूरदर्शी कदम का सीधा मकसद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खाद्य तेलों के दामों में हुई बढ़ोतरी के असर को भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंचने से रोकना और घरेलू बाजार में मूल्य स्थिरता बनाए रखना है।
आयात शुल्क में कटौती का विस्तृत गणित
वित्त और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार, कच्चे पाम तेल, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क में उल्लेखनीय कमी की गई है। साथ ही, रिफाइंड श्रेणियों के तेल पर भी शुल्क की दरों को संतुलित किया गया है ताकि प्रसंस्करण और रिफाइनरी उद्योगों को भी बढ़ावा मिले। शुल्क दरों में इस कटौती से आयातकों को मिलने वाले वित्तीय लाभ का बड़ा हिस्सा सीधे खुदरा उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा, जिससे आने वाले दिनों में पैकेज्ड एडिबल ऑयल की कीमतों में प्रति लीटर 8 से 15 रुपये तक की सीधी कमी देखने को मिल सकती है।
त्यौहारी सीजन में महंगाई पर लगाम लगाने का प्रयास
अक्टूबर और नवंबर का महीना भारत में त्यौहारों का सीजन होता है, जिस दौरान देश भर में मिठाइयों, पकवानों और खाद्य पदार्थों की मांग चरम पर होती है। ऐसे समय में खाद्य तेलों की मांग में कई गुना वृद्धि हो जाती है। यदि समय रहते आयात शुल्क नहीं घटाया जाता, तो त्यौहारों के दौरान आम जनता के किचन का बजट पूरी तरह से बिगड़ सकता था। सरकार के इस कदम से न केवल खुदरा खाद्य महंगाई दर (Food Inflation) को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण और होटल-रेस्तरां उद्योग को भी लागत में राहत मिलेगी।
घरेलू तेल उद्योग और किसानों के हितों का संतुलन
खाद्य तेलों पर कस्टम्स ड्यूटी घटाते समय सरकार ने घरेलू तिलहन किसानों (जैसे सरसों और मूंगफली उत्पादकों) के हितों का भी ध्यान रखा है। उद्योग जगत का मानना है कि आयात शुल्क में यह कटौती इस तरह से की गई है कि विदेश से सस्ता तेल आने के बावजूद स्थानीय किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और उचित दाम मिलता रहे। Solvent Extractors' Association of India (SEA) ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे उपभोक्ताओं और घरेलू रिफाइनिंग उद्योग दोनों के बीच एक आदर्श संतुलन कायम होगा।
दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की ओर कदम
यद्यपि अल्पकालिक राहत के लिए आयात शुल्क घटाना जरूरी था, लेकिन भारत आज भी अपनी खाद्य तेलों की कुल खपत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इस निर्भरता को कम करने के लिए सरकार 'राष्ट्रीय खाद्य तेल-पाम ऑयल मिशन' (NMEO-OP) को भी तेजी से आगे बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के इन नीतिगत सुधारों से जहाँ एक तरफ उपभोक्ताओं को तुरंत राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे और अनुसंधान में निवेश को और गति देने की आवश्यकता है।