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कूनो नेशनल पार्क की पर्यटकों के लिए दोबारा वापसी (16 चीते खुले जंगल में)

पर्यटन सत्र की शुरुआत और पार्क का फिर से खुलना मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) को मानसून के वार्षिक अवकाश के बाद 1 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए एक बार फिर से औपचारिक रूप से खोला जा रहा है।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
24 Sep 2026
Solar farm during sunset

पर्यटन सत्र की शुरुआत और पार्क का फिर से खुलना

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) को मानसून के वार्षिक अवकाश के बाद 1 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए एक बार फिर से औपचारिक रूप से खोला जा रहा है। प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah) के तहत वैश्विक स्तर पर सुर्खियों में आए इस पार्क में इस बार पर्यटकों के लिए रोमांच और भी ज्यादा होने वाला है। पार्क प्रशासन ने सफारी की बुकिंग, गाइड ट्रेनिंग और सफारी वाहनों की तकनीकी जांच की प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिससे वन्यजीव प्रेमियों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।

खुले जंगल में 16 चीतों की मौजूदगी

इस बार कूनो सफारी का मुख्य आकर्षण खुले जंगल में स्वच्छंद विचरण करते हुए 16 चीते होंगे। मानसून से पहले और मानसून के दौरान कई चीतों को सुरक्षात्मक कारणों से बाड़ों (Boma) में रखा गया था, लेकिन अब वे पूरी तरह से कूनो के खुले जंगल और प्राकृतिक आवास में ढल चुके हैं। इनमें भारत में ही पैदा हुए कुछ शावक भी शामिल हैं, जो अब बड़े हो चुके हैं और शिकार की कला सीख रहे हैं। पर्यटकों को इस बार चीतों को उनकी पूरी प्राकृतिक भव्यता और आक्रामक शिकार तकनीकों के साथ देखने का दुर्लभ अवसर मिलेगा।

प्रोजेक्ट चीता की सफलता और सुरक्षा उपाय

दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाए गए चीतों के भारत में पुनर्वास की यह परियोजना शुरुआती चुनौतियों के बाद अब मजबूती से आगे बढ़ रही है। पार्क के अधिकारियों और पशु चिकित्सकों की समर्पित टीम 24 घंटे सैटेलाइट कॉलर, ड्रोन और ग्राउंड पेट्रोलिंग के जरिए हर चीते की लोकेशन और स्वास्थ्य पर नजर रख रही है। खुले जंगल में चीतों के मुख्य भोजन यानी चीतल, सांभर और अन्य वन्यजीवों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। पार्क प्रबंधन का कहना है कि चीते अब इस भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को अपना स्थायी घर मान चुके हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा

कूनो नेशनल पार्क के फिर से खुलने से स्थानीय जनजातीय और ग्रामीण समुदाय के लिए आर्थिक अवसरों के नए द्वार खुल रहे हैं। होमस्टे, लोकल गाइड, हस्तशिल्प और सफारी चालकों के रूप में स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने कूनो के आसपास बर्ड वॉचिंग, कैंपिंग और नाइट सफारी जैसे नए आकर्षण भी जोड़े हैं। इससे न केवल घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का प्रवाह भी क्षेत्र में अभूतपूर्व रूप से बढ़ने की उम्मीद है।

भविष्य की योजनाएं और चुनौतियां

जैसे-जैसे कूनो में चीतों की संख्या बढ़ रही है, पार्क की क्षेत्रीय सीमाओं (Carrying Capacity) और चीतों के प्रादेशिक स्वभाव (Territorial Behavior) को संभालना एक नई चुनौती बन रहा है। प्रशासन अब कूनो से सटे अन्य संरक्षित क्षेत्रों, जैसे गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के दूसरे घर के रूप में तैयार कर रहा है। 1 अक्टूबर से शुरू हो रहा यह नया पर्यटन सत्र यह साबित करेगा कि भारत में बड़े मांसाहारी जीवों (Big Cats) के संरक्षण और ईको-टूरिज्म के बीच एक आदर्श संतुलन कैसे स्थापित किया जा सकता है।