एक्सप्रेसवे पर 'बर्निंग बस' का खौफनाक मंजर: यात्री की जबानी,यात्रा की शुरुआत और शुरुआती अनहोनी की आहट
सब कुछ रोजमर्रा की तरह सामान्य था। यात्री अपनी-अपनी सीटों पर आराम से बैठे थे, कोई सो रहा था तो कोई फोन पर व्यस्त था। बस एक्सप्रेसवे की तेज रफ्तार लेन पर फर्राटा भर रही थी। लेकिन सफर के कुछ ही घंटों बाद बस के पिछले हिस्से से जलने की तीखी बदबू आने लगी। हवा के बहाव के साथ केबिन के अंदर फैलती इस गंध ने यात्रियों को असहज कर दिया। केबिन में धीरे-धीरे एक अजीब सी सुगबुगाहट फैलने लगी और सफर का सुकून अचानक एक अज्ञात डर और बेचैनी में बदलने लगा।
यात्रियों की चेतावनी और चालक की भारी लापरवाही
बदबू तेज होते ही यात्रियों ने तुरंत बस चालक को सतर्क किया और उससे गाड़ी को किनारे रोककर जांच करने का आग्रह किया। यात्रियों ने चिल्लाकर कहा कि पीछे कुछ जल रहा है या ब्रेक में घर्षण हो रहा है, लेकिन ड्राइवर ने इन चेतावनियों को पूरी तरह अनदेखा कर दिया। उसने यात्रियों को यह कहकर आश्वस्त करने की कोशिश की कि यह एक्सप्रेसवे पर बाहर चल रहे किसी अन्य वाहन या टायर के घिसने की सामान्य गंध है। ड्राइवर बस की रफ्तार कम करने या उसे रोकने के बजाय गाड़़ी को तेज गति से दौड़ाता रहा, जो आगे चलकर एक बड़ी तबाही का कारण बन गई।
धुएं का गुबार और 'बर्निंग बस' में तब्दील होता वाहन
ड्राइवर की लापरवाही का नतीजा कुछ ही मिनटों में सामने आ गया। अचानक बस के निचले हिस्से से आग की ऊंची लपटें उठने लगीं और देखते ही देखते काला घुटन भरा धुआं बस के अंदर भरने लगा। खिड़कियों और फर्श के दरारों से निकलते धुएं ने यात्रियों का सांस लेना दूभर कर दिया। पल भर में ही चीख-पुकार मच गई। एक्सप्रेसवे पर 100 किमी प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से दौड़ रही बस एक चलती-फिरती 'बर्निंग बस' बन चुकी थी। हर तरफ आग की लपटें थीं और बस के अंदर केवल मौत का खौफ साफ नजर आ रहा था।
खौफनाक मंजर: जान बचाने की बदहवास जंग
जब ड्राइवर को स्थिति की भयानकता का अहसास हुआ, तो उसने आनन-फानन में बस को एक्सप्रेसवे के किनारे रोक दिया। बस रुकते ही यात्रियों में बाहर निकलने की होड़ मच गई। दरवाजे पर भारी भीड़ और भगदड़ की स्थिति बन गई। धुआं इतना घना था कि कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसे में कई यात्रियों ने जान बचाने के लिए बस की खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए और कूदना शुरू कर दिया। चीखते-चिल्लाते लोग, बच्चों को बचाती मांएं और आग की तेज लपटों का वह खौफनाक दृश्य किसी बुरे सपने जैसा था। कई लोग खिड़कियों से कूदने के कारण घायल भी हो गए।
राहत-बचाव और लापरवाही पर सुलगते गंभीर सवाल
घटना की सूचना मिलते ही एक्सप्रेसवे गश्ती टीम और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक पूरी बस जलकर कंकाल बन चुकी थी। खुशकिस्मती से समय रहते यात्रियों के बाहर निकल जाने से एक बड़ा नरसंहार टल गया, हालांकि कई यात्री झुलसने और चोटिल होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। यह हादसा सड़क सुरक्षा और बस चालकों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि ड्राइवर ने समय रहते यात्रियों की बात मानकर बस रोक ली होती, तो यात्रियों को इस खौफनाक मंजर से नहीं गुजरना पड़ता और लाखों की संपत्ति जलकर खाक होने से बच जाती।