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मिडिल ईस्ट महायुद्ध का बिगुल

मिडिल ईस्ट का बारूद अब पूरी तरह सुलग चुका है। हाल ही में सउदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी 'अरामको' के मुख्यालय और रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाकर किए गए भीषण हमलों ने पूरी दुनिया के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। यमन के हुथी विद्रोहियों द्वारा दागी गई मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन ने सऊदी अरब के आसमान को धुएं के गुबार से भर दिया।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
16 Oct 2026
Solar farm during sunset

मिडिल ईस्ट का बारूद अब पूरी तरह सुलग चुका है। हाल ही में सउदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी 'अरामको' के मुख्यालय और रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाकर किए गए भीषण हमलों ने पूरी दुनिया के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। यमन के हुथी विद्रोहियों द्वारा दागी गई मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन ने सऊदी अरब के आसमान को धुएं के गुबार से भर दिया। इस अप्रत्याशित हमले में कई कमर्शियल विमान जलकर खाक हो गए और वैश्विक एयरलाइंस ने रियाद से अपनी उड़ानों को रातों-रात सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया है।  

अमेरिका ने इस स्थिति को देखते हुए मिडिल ईस्ट में भारी सैन्य जमावड़ा शुरू कर दिया है और पेंटागन ईरान से जुड़े इन नेटवर्क को तबाह करने के लिए अपने सबसे शक्तिशाली हथियारों के इस्तेमाल पर विचार कर रहा है। फारस की खाड़ी में युद्ध के इस सीधे खतरे ने पूरी दुनिया के आर्थिक बाजार में भूचाल ला दिया है।  

इस भीषण संघर्ष का सबसे सीधा असर होर्मुज की जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पड़ रहा है, जो वैश्विक क्रूड ऑयल सप्लाई की लाइफलाइन है। कच्चे तेल की कीमतों में आए अप्रत्याशित उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है।

भारत के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है। भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है और इस क्षेत्र में जारी तनातनी ने भारतीय तेल आयात रणनीति को बुरी तरह प्रभावित किया है। हालिया व्यवधानों के चलते भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को अब ओमान और अन्य वैकल्पिक देशों का रुख करना पड़ रहा है।

इसके अलावा, खाड़ी देशों में करोड़ों भारतीय प्रवासी रहते हैं। अगर युद्ध का यह दायरा और फैलता है, तो भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वहां से आने वाले रेमिटेंस (प्रेषित धन) पर सीधा और गहरा संकट मंडराने लगेगा।

भारत की कूटनीति के लिए यह वक्त सबसे कठिन अग्निपरीक्षा का है। एक तरफ नई दिल्ली के सऊदी अरब और यूएई के साथ रणनीतिक व व्यापारिक रिश्ते बेहद मजबूत हैं, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ चाबहार पोर्ट और सुरक्षा सहयोग का संतुलन साधना भी बेहद जरूरी है। भारत लगातार बातचीत और संयम की अपील कर रहा है, लेकिन अगर खाड़ी की आग ठंडी नहीं हुई, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों की सीधी मार पड़ना तय है।  

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