बिहार के एक जिले में एक बार फिर निर्माणाधीन पुल के ढहने की घटना सामने आई है। नदी पर बन रहे एक बड़े पुल का मुख्य स्लैब (Slab) अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया। घटना के समय पुल पर कुछ मजदूर काम कर रहे थे, जिससे मलबे के नीचे कई मजदूरों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
हादसा इतना अचानक हुआ कि मजदूरों को भागने का मौका तक नहीं मिला। एक जोरदार आवाज के साथ पुल का पिलर और उस पर टिका स्लैब नदी में जा गिरा। आसपास के ग्रामीणों ने जब यह दृश्य देखा, तो वे तुरंत बचाव के लिए दौड़े और स्थानीय प्रशासन को सूचित किया।
सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें मौके पर पहुंचीं। नदी के तेज बहाव और भारी मलबे के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। क्रेन और नावों की मदद से मलबे को हटाने और फंसे हुए मजदूरों की तलाश का काम जारी है। घायलों को इलाज के लिए नजदीकी सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
निर्माणाधीन पुल के गिरते ही गुणवत्ता और भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था और कई बार शिकायत के बावजूद ठेकेदार और इंजीनियरों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। इस घटना से राज्य सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
राज्य के पथ निर्माण विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच समिति का गठन कर दिया है। संबंधित ठेकेदार और संबंधित विभागीय इंजीनियरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।