नोएडा और दिल्ली के बीच चलने वाली एक निजी स्लीपर बस में छात्रा के साथ हुई बर्बरता की घटना सामने आई है। पीड़िता के अनुसार, वह देर रात बस में यात्रा कर रही थी, तभी उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया। पीड़िता ने किसी तरह शोर मचाने और विरोध करने की कोशिश की, जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। इस घटना से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
घटना की सूचना मिलने के बाद जब पीड़िता शिकायत दर्ज कराने पहुंची, तो क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) को लेकर दिल्ली और नोएडा पुलिस के बीच विवाद शुरू हो गया। दोनों राज्यों की पुलिस सीमा विवाद का हवाला देते हुए एक-दूसरे के इलाके में घटना होने की बात कहती रही। इस प्रशासनिक ढिलाई के कारण मामला दर्ज करने में देरी हुई, जिससे पीड़िता और उसके परिवार को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
मामला मीडिया और उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद दोनों राज्यों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। सीमा विवाद पर पुलिस महकमे में भारी हड़कंप मच गया और आनन-फानन में जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई। अधिकारियों ने माना कि ऐसे संवेदनशील मामलों में क्षेत्राधिकार को लेकर देरी करना पूरी तरह से गलत था और संबंधित कर्मियों से जवाब तलब किया गया।
विशेष जांच टीम ने बस के रूट, सीसीटीवी फुटेज और यात्रियों की सूची की जांच शुरू कर दी है। बस ऑपरेटर से भी पूछताछ की जा रही है। संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है और पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर कड़ी कानूनी सजा दिलाई जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक और निजी परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों और नागरिक समाज ने पुलिस के रवैये की कड़ी आलोचना की है। पुलिस महकमे ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना में क्षेत्राधिकार को बाधा नहीं बनने दिया जाएगा और त्वरित कार्रवाई की जाएगी।