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कुहेस्ताक हवाई हमला: क्या अमेरिकी हवाई स्ट्राइक से भड़केगी पूरे मध्य पूर्व में अंतिम जंग?

मध्य पूर्व के सुलगते मोर्चे पर उस समय एक और भीषण और दर्दनाक मानवीय दुखांतिका सामने आई जब ईरान के होरमुज़गान प्रांत के तटीय शहर कुहेस्ताक (Kuhestak) में एक आवासीय घर पर हुए अमेरिकी हवाई हमले में विवाह समारोह में शामिल 5 आम नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई और 63 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
29 Sep 2026
Solar farm during sunset

मध्य पूर्व के सुलगते मोर्चे पर उस समय एक और भीषण और दर्दनाक मानवीय दुखांतिका सामने आई जब ईरान के होरमुज़गान प्रांत के तटीय शहर कुहेस्ताक (Kuhestak) में एक आवासीय घर पर हुए अमेरिकी हवाई हमले में विवाह समारोह में शामिल 5 आम नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई और 63 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। ईरानी राज्य मीडिया और आपातकालीन सेवाओं ने इस हमले के भयानक मंज़र की तस्वीरें जारी करते हुए इसे वाशिंगटन द्वारा किया गया एक क्रूर 'युद्ध अपराध' (War Crime) करार दिया है। पेंटागन के सेंट्रल कमान (CENTCOM) ने माना कि यह हमला ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया था।  

यह घातक हवाई हमला दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी उस भयानक सैन्य झड़प की श्रृंखला का हिस्सा है जहाँ अमेरिकी नौसेना ईरानी सैन्य ठिकानों पर सीधे मिसाइलें बरसा रही है। लेकिन एक शादी के घर पर हुए इस नागरिक संहार ने तेहरान के भीतर जनआक्रोश को भड़का दिया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और रक्षा कमान ने चेतावनी दी है कि निर्दोष नागरिकों के खून की हर एक बूंद का हिसाब अमेरिकी सैन्य अड्डों और खाड़ी में तैनात उसके नौसैनिक बेड़ों पर मिसाइलें दागकर लिया जाएगा।  

इस घटनाक्रम के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। जहाँ पेरू जैसे देशों ने ईरान पर युद्ध भड़काने का आरोप लगाकर कूटनीतिक संबंध तोड़ लिए हैं, वहीं कई एशियाई और अफ्रीकी देशों ने अमेरिका द्वारा नागरिक आबादी वाले क्षेत्रों में की जा रही इस बमबारी की तीखी निंदा की है। इस हवाई हमले ने अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद ज्ञापन के तहत जारी सीज़फायर और शांति वार्ताओं की रही-सही उम्मीदों पर भी पूरी तरह पानी फेर दिया है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में 'ऑल-आउट वॉर' (All-Out War) का खतरा अपने चरम पर पहुंच गया है।

भारतीय परिप्रेक्ष्य में, ईरान के तटीय इलाकों में अमेरिकी सेना की यह सीधी बमबारी और नागरिकों की मौत भारत की सुरक्षा और कूटनीति के लिए एक बेहद खौफनाक सपना है। ईरान का यह होरमुज़गान क्षेत्र भारत के महत्वाकांक्षी 'चाबहार बंदरगाह' (Chabahar Port) और 'नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर' (INSTC) के बेहद करीब स्थित है। यदि अमेरिका और ईरान का यह युद्ध तटीय आबादी और बुनियादी ढाँचे को तबाह करता है, तो चाबहार में भारत का अरबों डॉलर का रणनीतिक निवेश पूरी तरह ठप्प हो जाएगा।

इसके अलावा, इस घटना से भड़की हिंसा के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय तेल टैंकरों पर हमले और बीमे की दरों में अभूतपूर्व उछाल आ चुका है। भारत के लिए अपनी दैनिक कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की जरूरतों को पूरा करना अब दिन-ब-दिन और अधिक जोखिम भरा और खर्चीला होता जा रहा है। भारत में ईंधन की दरें बढ़ने से घरेलू अर्थव्यवस्था में खाद्य पदार्थों और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बेकाबू होने का सीधा खतरा पैदा हो गया है।

कूटनीतिक स्तर पर, भारत ने हमेशा 'नागरिक हताहतों' (Civilian Casualties) का कड़ा विरोध किया है और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के पूर्ण पालन का आह्वान किया है। भारत की विदेश नीति अमेरिका के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को बनाए रखते हुए ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक और ऊर्जा संबंधों को बचाने की कठिन परीक्षा से गुजर रही है। भारत पर्दे के पीछे से दोनों देशों से 'तत्काल युद्धविराम' और संयम बरतने की अपील कर रहा है, ताकि इस रणनीतिक जलमार्ग को तबाही से बचाकर भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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