संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय पीठ ने संयुक्त राज्य अमेरिका की नई और आक्रामक प्रवासन नीति (US Migration Policy) के खिलाफ एक अत्यंत सख्त और ऐतिहासिक चेतावनी जारी की है। यूएन विशेषज्ञों ने सार्वजनिक रिपोर्ट जारी कर खुलासा किया है कि अमेरिका द्वारा अपने देश में आने वाले प्रवासियों और शरणार्थियों को जबरन पकड़कर 'तीसरे देशों' (Third Countries) में भेजने की नीति दुनिया भर में मानवाधिकारों के हनन की एक भयानक श्रृंखला (Cascade of Rights Violations) को जन्म दे रही है। इस रिपोर्ट ने वाशिंगटन के स्वघोषित 'मानवाधिकारों के मसीहा' वाले चेहरे पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट के आंकड़ों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। अब तक कम से कम 23,000 प्रवासियों को पकड़कर दुनिया के 29 अलग-अलग देशों और दूर-दराज के क्षेत्रों में निर्वासित (Deported) किया जा चुका है, और वाशिंगटन हर दिन नए देशों के साथ ऐसे जबरन निर्वासन समझौतों पर हस्ताक्षर कर रहा है। यूएन विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि जिन देशों में इन शरणार्थियों को भेजा जा रहा है, उनमें से कई खुद गरीबी, गृहयुद्ध और हिंसा की चपेट में हैं, जिससे निर्वासित लोगों को प्रताड़ना, अपहरण और गायब किए जाने के भयानक खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
वाशिंगटन की इस कड़े 'डिटेरेंस' (Deterrence) वाली नीति का सबसे दर्दनाक असर महिलाओं, बच्चों और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों पर पड़ा है, जिन्हें बिना किसी कानूनी सलाह या वित्तीय मदद के अनजान देशों में छोड़ दिया जाता है। यूएन ने अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए अमेरिकी सरकार से इस अनैतिक और गैर-कानूनी प्रवासन योजना को तुरंत रोकने की मांग की है। हालाँकि, अमेरिकी प्रशासन ने अपने इस कदम का बचाव करते हुए कहा है कि अपनी सीमाओं की सुरक्षा और अवैध घुसपैठ को रोकना उसकी सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में, अमेरिका की इस नई और कड़ी प्रवासन नीति का सीधा और बड़ा असर उन हजारों भारतीय नागरिकों पर पड़ रहा है जो अवैध रास्तों (डंकी रूट) से या वीजा अवधि समाप्त होने के बाद अमेरिका में रह रहे हैं। अमेरिकी सीमा गश्ती दल द्वारा पकड़े जाने वाले भारतीय अनधिकृत प्रवासियों को अब अमेरिका से सीधे भारत भेजने के बजाय किसी तीसरे अनजान देश (जैसे मध्य अमरीकी या अफ्रीकी देशों) में निर्वासित किए जाने का भारी जोखिम पैदा हो गया है, जहाँ उनकी जान-माल की कोई सुरक्षा गारंटी नहीं है।
यह घटनाक्रम भारत के लिए अपनी घरेलू सीमाओं पर अवैध मानव तस्करी (Human Trafficking Rackets) के खिलाफ कड़े कदम उठाने की तात्कालिकता को भी रेखांकित करता है। पंजाब, हरियाणा और गुजरात जैसे राज्यों से युवाओं को अमेरिका में अवैध प्रवेश कराने वाले फर्जी ट्रैवल एजेंटों और अंतरराष्ट्रीय गिरोहों पर नकेल कसना अब केंद्र और राज्य सरकारों के लिए एक प्रमुख आंतरिक सुरक्षा एजेंडा बन गया है।
कूटनीतिक स्तर पर, भारत ने हमेशा वैध प्रवासन (Legal Migration) और कुशल पेशेवरों की सुगम आवाजाही का समर्थन किया है, जबकि अवैध घुसपैठ का कड़ा विरोध किया है। भारत सरकार अमेरिकी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पकड़े गए भारतीय नागरिकों को 'तीसरे देश' में भेजने के बजाय सीधे और सम्मानजनक तरीके से भारत वापस लाया जाए। भारत का यह मानवीय और जिम्मेदार दृष्टिकोण यह साबित करता है कि वह अपने नागरिकों के मूल मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पूरी मजबूती से खड़ा है।
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