भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को शेष भारत से जोड़ने वाले सबसे संवेदनशील और पतले भू-भाग—'सिलिगुड़ी गलियारे' (Siliguri Corridor) जिसे रणनीतिक भाषा में 'चिकन नेक' (Chicken's Neck) कहा जाता है, के समीप अचानक बढ़े संदिग्ध सैन्य जमावड़े और ड्रोन गतिविधियों के बाद भारतीय थल सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने इस पूरे इलाके में 'ऑपरेशन सतर्क' के तहत त्रिशूल-स्तरीय युद्ध अभ्यास शुरू कर दिया है। खुफिया इनपुट के अनुसार, सीमा पार से इस रणनीतिक गलियारे के करीब नए फॉरवर्ड बेस और वॉच टावर बनाने की गुप्त कोशिशें की जा रही थीं, जिसका उद्देश्य संकट के समय पूर्वोत्तर भारत का संपर्क बाकी देश से काटने का दबाव बनाना था।
सिलिगुड़ी गलियारा महज 22 किलोमीटर चौड़ा एक ऐसा भू-भाग है जिसके एक तरफ नेपाल, दूसरी तरफ बांग्लादेश और उत्तर में भूटान से लगा डोकलाम क्षेत्र है। यदि दुश्मन कभी इस पतली पट्टी पर हमला करके इसे बाधित करने में कामयाब हो जाता है, तो भारत के सभी आठ उत्तर-पूर्वी राज्य (जैसे असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड आदि) मुख्य भू-भाग से पूरी तरह कट सकते हैं। इसी गंभीर खतरे को देखते हुए भारतीय सेना ने इस इलाके में अपने सबसे अत्याधुनिक 'टी-90 भीष्म' टैंक, राफेल लड़ाकू विमान और 'एस-400' वायु रक्षा प्रणालियों की तैनाती को अभेद्य बना दिया है।
भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पर्दाफाश किया है कि विदेशी खुफिया एजेंसियां और उनके प्रायोजित चरमपंथी समूह इस चिकन नेक कॉरिडोर के आसपास की जनसांख्यिकी (Demographics) को बदलने और स्थानीय अशांति फैलाने के लिए भारी मात्रा में बेनामी संपत्ति और विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल कर रहे थे। भारतीय सुरक्षा बलों ने पिछले कुछ दिनों में इस इलाके से कई उच्च-स्तरीय जासूसों और अवैध घुसपैठियों को आधुनिक संचार उपकरणों के साथ गिरफ्तार किया है, जिससे इस अंतरराष्ट्रीय साजिश की परतें उघड़ने लगी हैं।
भारतीय संदर्भ में, सिलिगुड़ी गलियारे की सुरक्षा सीधे तौर पर भारत की अखंडता, पूर्वोत्तर की सुरक्षा और 'एक्ट ईस्ट नीति' की धुरी है। अरुणाचल प्रदेश पर चीन के बार-बार के अवैध दावों और डोकलाम पठार पर उसकी आक्रामक गतिविधियों के बीच भारत इस 22 किलोमीटर की पट्टी पर किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं उठा सकता। भारतीय सेना द्वारा चलाए जा रहे इस बड़े सैन्य अभियान ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी भौगोलिक सुरक्षा से रत्ती भर भी समझौता नहीं करेगा।
इस खतरे से स्थायी रूप से निपटने के लिए भारत सरकार ने चिकन नेक कॉरिडोर के समानांतर नए वैकल्पिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण तेजी से शुरू कर दिया है। बांग्लादेश के रास्ते नए रेल और सड़क संपर्क, और 'कलदान मल्टी-मॉडल प्रोजेक्ट' के माध्यम से म्यांमार के रास्ते नौवहन मार्ग विकसित किए जा रहे हैं, ताकि पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुँचने के लिए केवल इस एक गलियारे पर निर्भर न रहना पड़े। यह दूरदर्शी बुनियादी ढाँचा भारत को किसी भी नाकेबंदी से पूरी तरह सुरक्षित करता है।
सैन्य कूटनीति के स्तर पर, भारत ने नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के साथ अपने द्विपक्षीय सुरक्षा संपर्कों को और मजबूत कर लिया है ताकि सीमा पार की गतिविधियों की रीयल-टाइम जानकारी साझा की जा सके। भारतीय सेना का यह अभेद्य रुख और चौकसी यह साबित करती है कि भारत के पूर्वोत्तर की ओर उठने वाली किसी भी बुरी नज़र को भारतीय रक्षा बल सीमाओं पर ही कुचलने के लिए पूरी तरह सक्षम और कटिबद्ध हैं।
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