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दक्षिण चीन सागर में नया नौसैनिक गतिरोध: फिलीपींस और चीन के पोत टकराए, US अलर्ट!

दक्षिण चीन सागर के विवादित 'सेकंड थॉमस शोल' के पास चीन के तटरक्षक जहाज और फिलीपींस के आपूर्ति पोत के बीच एक और भीषण सीधी टक्कर हो गई है। चीनी नौसेना ने फिलीपींस के जहाजों को रोकने के लिए उन पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और आक्रामक घेराबंदी की

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
01 Oct 2026
Solar farm during sunset

दक्षिण चीन सागर के विवादित 'सेकंड थॉमस शोल' के पास चीन के तटरक्षक जहाज और फिलीपींस के आपूर्ति पोत के बीच एक और भीषण सीधी टक्कर हो गई है। चीनी नौसेना ने फिलीपींस के जहाजों को रोकने के लिए उन पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और आक्रामक घेराबंदी की, जिससे फिलीपींस के कई सैनिक घायल हो गए। इस घटना के तुरंत बाद मनीला में आपातकाल जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है और फिलीपींस ने चीन के राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

इस टक्कर के बाद वाशिंगटन की तरफ से बेहद तीखी प्रतिक्रिया आई है। अमेरिका ने अपने 'परस्पर रक्षा समझौते' (US-Philippines Mutual Defense Treaty) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि फिलीपींस के सशस्त्र बलों या जहाजों पर कोई भी सशस्त्र हमला होता है, तो अमेरिका अपनी सेना को सीधे मैदान में उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। अमेरिकी पैसिफिक कमान ने इस क्षेत्र में अपने विमान वाहक पोत और मिसाइल गाइडेड डिस्ट्रॉयर्स की तैनाती बढ़ा दी है, जिससे इस इलाके में अमेरिका और चीन के बीच सीधे सैन्य संघर्ष का खतरा उत्पन्न हो गया है।

चीन ने इस क्षेत्र पर अपना ऐतिहासिक 'नाइन-डैश लाइन' का दावा दोहराते हुए कहा है कि वह अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी बाहरी शक्ति के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा। आसियान (ASEAN) के अन्य देश जैसे वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया भी इस घटनाक्रम से भारी तनाव में हैं, क्योंकि दक्षिण चीन सागर से होने वाला खरबों डॉलर का वैश्विक व्यापार इस नौसैनिक गतिरोध के कारण कभी भी ठप पड़ सकता है।

भारतीय परिपेक्ष्य में, यह नौसैनिक टकराव भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और इंडो-पैसिफिक रणनीति के लिए बेहद संवेदनशील मामला है। भारत के लगभग 55 प्रतिशत से अधिक समुद्री व्यापार का रास्ता इसी दक्षिण चीन सागर से होकर जाता है। इस क्षेत्र में चीन का एकतरफा दबदबा या सैन्य तनाव बढ़ना भारत के आर्थिक और व्यापारिक हितों को सीधे नुकसान पहुँचाएगा।

भारत ने फिलीपींस के साथ हाल के वर्षों में अपने रणनीतिक संबंधों को काफी मजबूत किया है और उसे 'ब्रह्मोस' सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की आपूर्ति भी की है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों (UNCLOS) का सम्मान करने और दक्षिण चीन सागर में 'नौवहन की स्वतंत्रता' (Freedom of Navigation) बनाए रखने का पुरजोर समर्थन किया है। भारतीय नौसेना इंडो-पैसिफिक में अपने मित्र देशों के साथ युद्धाभ्यास कर चीनी नौसैनिक विस्तार को संतुलित करने में जुटी है।

संक्षेप में, दक्षिण चीन सागर की यह नई नौसैनिक भिड़ंत यह दिखाती है कि इंडो-पैसिफिक में तनाव किस हद तक बढ़ चुका है। यदि इस मुद्दे को कूटनीतिक रास्ते से नहीं सुलझाया गया, तो यह स्थानीय विवाद एक बड़े वैश्विक महासंग्राम का रूप ले सकता है। भारत को इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति और नौसैनिक सतर्कता बनाए रखनी होगी ताकि समुद्री व्यापार के रास्ते निर्बाध बने रहें।

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