अमेरिकी सरकार और वैश्विक सुरक्षा हलकों से एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर आई है। टेक अरबपति एलन मस्क ने एक बार फिर वाशिंगटन की राजनीति और रक्षा नीति में प्रभावशाली वापसी की है। पेंटागन ने घोषणा की है कि एलन मस्क अमेरिकी रक्षा विभाग के उस विशेष उच्च-स्तरीय अध्ययन (Study on Future of Warfare) का सह-नेतृत्व (Co-lead) करेंगे, जो भविष्य के युद्धों, स्वायत्त हथियारों और अंतरिक्ष-आधारित रक्षा प्रणालियों की रूपरेखा तय करेगा।
मस्क की इस नियुक्ति से चीन, रूस और नाटो सहयोगियों के बीच भारी खलबली मच गई है। स्टारलिंक (Starlink) और स्पेसएक्स (SpaceX) जैसी क्रांतिकारी अंतरिक्ष व रक्षा तकनीकों के मालिक मस्क की अमेरिकी सैन्य रणनीति में सीधी भागीदारी का मतलब है कि अमेरिका अब पारंपरिक हथियारों के बजाय एआई, स्वायत्त ड्रोन्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए भविष्य के युद्धों पर पूरा कब्जा जमाने की तैयारी कर रहा है।
चीन के रक्षा विशेषज्ञों ने वाशिंगटन के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बीज़िंग का मानना है कि निजी टेक कंपनियों और अमेरिकी सेना का यह गठजोड़ अंतरिक्ष के सैन्याचीकरण और एआई हथियारों की होड़ को एक खतरनाक स्तर पर ले जाएगा। नाटो सहयोगियों को भी डर है कि अमेरिकी सैन्य नीति अब पूरी तरह से टेक-जायंट्स के व्यावसायिक और रणनीतिक एजेंडे से संचालित हो सकती है, जिससे पारंपरिक बहुपक्षीय सुरक्षा समझौते कमजोर हो सकते हैं।
भारतीय परिपेक्ष्य में, मस्क और पेंटागन का यह गठजोड़ भारत-अमेरिका रक्षा-तकनीक साझेदारी (iCET) के लिए नए आयाम खोल सकता है। भारत और अमेरिका पहले से ही महत्वपूर्ण और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों (Critical Technologies) पर मिलकर काम कर रहे हैं। मस्क के प्रभाव में अमेरिकी रक्षा नीतियों का ध्यान इंडो-पैसिफिक में चीन के तकनीकी विस्तार को रोकने पर केंद्रित रहेगा, जिसका सीधा रणनीतिक लाभ भारत को मिल सकता है।
हालांकि, भारत को अपनी रक्षा प्रणालियों में विदेशी टेक दिग्गजों (जैसे स्टारलिंक) पर अति-निर्भरता से बचना होगा। भारत सरकार का मुख्य जोर स्वदेशी एआई-आधारित सैन्य तकनीकों (AIDef) और स्पेस डिफ़ेंस को तेजी से विकसित करने पर है। भारत मस्क की कंपनियों के साथ वाणिज्यिक सहयोग तो बढ़ा सकता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में देश अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को सर्वोपरि रखेगा।
निष्कर्ष यह है कि एलन मस्क की पेंटागन में यह वापसी इस बात का साफ संकेत है कि 21वीं सदी के युद्ध अब सिर्फ बारूद से नहीं, बल्कि एआई एल्गोरिदम, स्पेस सैटेलाइट्स और सिलिकॉन चिप्स से जीते जाएंगे। भारत को इस बदलते वैश्विक रक्षा परिदृश्य में अपनी टेक-डिफेंस क्षमता को और अधिक आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाना होगा।
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