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महत्वपूर्ण खनिजों पर भू-राजनीतिक तनातनी से हरित ऊर्जा उद्योग संकट में

वैश्विक ऊर्जा संक्रमण (Global Energy Transition) के मुख्य आधार माने जाने वाले 'क्रिटिकल मिनरल्स' जैसे लिथियम, कोबाल्ट, तांबा और रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर नियंत्रण को लेकर दुनिया की महाशक्तियों के बीच एक नया और आक्रामक 'संसाधन युद्ध' (Resource War) छिड़ गया है

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
03 Oct 2026

वैश्विक ऊर्जा संक्रमण (Global Energy Transition) के मुख्य आधार माने जाने वाले 'क्रिटिकल मिनरल्स' जैसे लिथियम, कोबाल्ट, तांबा और रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर नियंत्रण को लेकर दुनिया की महाशक्तियों के बीच एक नया और आक्रामक 'संसाधन युद्ध' (Resource War) छिड़ गया है। प्रमुख उत्पादक देशों द्वारा निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाने और सब्सिडी में बदलाव करने के बाद अंतरराष्ट्रीय हरित ऊर्जा उद्योग में भारी मंदी और अनिश्चितता का माहौल बन गया है।

अनेक वित्तीय और बैंकिंग संस्थानों ने चेतावनी जारी की है कि जीवाश्म ईंधन से दूरी बनाने की होड़ में दुनिया अब दुर्लभ खनिजों के एक बड़े आपूर्ति-शृंखला जाल (Supply Chain Trap) में फंसती जा रही है। बैटरी और नवीकरणीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए आवश्यक इन खनिजों का प्रसंस्करण और खनन कुछ ही देशों के हाथों में केंद्रित है। इस एकाधिकार का उपयोग देश अब भू-राजनीतिक हथियार के रूप में करने लगे हैं।

व्यापारिक बाधाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर बनाए जा रहे नए कानूनों के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और सौर ऊर्जा परियोजनाओं की उत्पादन लागत अचानक आसमान छूने लगी है। यूरोप और अमेरिका के केंद्रीय बैंक इस अनिश्चितता को वित्तीय स्थिरता के लिए एक बड़ा जोखिम मान रहे हैं, क्योंकि कई ग्रीन फिनटेक कंपनियां दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गई हैं।  

महाशक्तियों द्वारा रणनीतिक खनिजों के भंडार (Strategic Mineral Reserves) की होड़ ने अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई देशों को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। यह भू-राजनीतिक खींचतान यदि ऐसे ही जारी रही, तो 2030 तक के वैश्विक कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा करना असंभव हो जाएगा।

भारतीय परिपेक्ष्य में विश्लेषण:

भारत के लिए यह 'मिनरल वॉर' एक बहुत बड़ी चुनौती है, क्योंकि भारत अपने ईवी (EV) और सोलर विनिर्माण अभियानों के लिए दुर्लभ खनिजों के आयात पर बहुत हद तक निर्भर है। इस भू-राजनीतिक अनिश्चितता से निपटने के लिए भारत ने हाल ही में 'खनिज विदेश इंडिया लिमिटेड' (KABIL) के जरिए विदेशों में खदानें हासिल करने की रणनीति बनाई है। भारत को अपनी रक्षा तकनीक और हरित इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रखने के लिए घरेलू स्तर पर क्रिटिकल मिनरल्स की खोज, प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति-शृंखला को सुरक्षित बनाने की दिशा में और तेजी से काम करना होगा।  

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