यूरोप की प्रमुख अर्थव्यवस्था और नाटो के मुख्य स्तंभ फ्रांस में आंतरिक असंतोष का एक नया और विशाल ज्वालामुखी फूट पड़ा है। पूरे देश में हजारों की संख्या में छात्रों और शिक्षकों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, कक्षाओं में जरूरत से ज्यादा भीड़ और जर्जर शैक्षणिक बुनियादी ढांचे के विरोध में हुआ यह आंदोलन अब पूरे फ्रांस में जंगल की आग की तरह फैल चुका है।
अंतरराष्ट्रीय न्यूज पोर्टल्स के अनुसार, पेरिस से लेकर मार्सिले तक विश्वविद्यालय और स्कूल पूरी तरह ठप्प पड़े हैं। पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच हिंसक झड़पें हो रही हैं। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार के लिए यह आंदोलन एक बड़ा राजनीतिक संकट बन चुका है, क्योंकि रक्षा बजट और सैन्य खर्चों में बेतहाशा बढ़ोतरी के बीच शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा बजट में की गई कटौती से यूरोपीय नागरिक अब पूरी तरह आक्रोशित हैं।
यूक्रेन युद्ध और यूरोपीय संघ की आर्थिक मंदी के कारण पूरे यूरोप में जीवन-यापन का संकट (Cost of Living Crisis) गहरा गया है। फ्रांस का यह छात्र आंदोलन इस बात का सबूत है कि यूरोपीय देश अपनी घरेलू समस्याओं को नजरअंदाज करके लंबे समय तक विदेशी युद्धों पर पैसा नहीं बहा सकते। ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस में सामाजिक असंतोष का यह नया दौर पश्चिमी नेतृत्व की नीतियों की पोल खोल रहा है।
भारतीय परिपेक्ष्य में, फ्रांस भारत का सबसे करीबी और भरोसेमंद यूरोपीय रणनीतिक और रक्षा साझेदार है। राफेल फाइटर जेट्स से लेकर असैन्य परमाणु ऊर्जा और नौसैनिक तकनीक तक, भारत और फ्रांस के रिश्ते बेहद प्रगाढ़ हैं। फ्रांस में बढ़ता आंतरिक असंतोष और राजनीतिक अस्थिरता मैक्रों सरकार की निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
इसके अतिरिक्त, फ्रांस में हजारों भारतीय छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल और अशांति के कारण भारतीय छात्रों की पढ़ाई और सुरक्षा को लेकर भारत सरकार पूरी तरह सतर्क है। भारतीय दूतावास पेरिस में भारतीय समुदाय के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर रहा है।
भारत बहुत बारीकी से यूरोपीय देशों के इस आंतरिक पतन का अध्ययन कर रहा है। यह घटनाक्रम भारत को यह सीख देता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा तैयारियों को मजबूत करते हुए देश के आंतरिक सामाजिक और शैक्षिक ढांचे का संतुलन बनाए रखना कितना अनिवार्य है।
#FranceProtests #EuropeInCrisis #StudentsProtest #IndiaFrance #GlobalDiplomacy