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डॉलर पर आघात: ब्रिक्स का डिजिटल दांव

वैश्विक वित्तीय प्रणाली में एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक फेरबदल आकार ले रहा है। ब्रिक्स (BRICS) देशों के समूह ने अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को खत्म करने की दिशा में अपना अब तक का सबसे बड़ा और साहसिक कदम उठा लिया है

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
05 Oct 2026
Solar farm during sunset

वैश्विक वित्तीय प्रणाली में एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक फेरबदल आकार ले रहा है। ब्रिक्स (BRICS) देशों के समूह ने अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को खत्म करने की दिशा में अपना अब तक का सबसे बड़ा और साहसिक कदम उठा लिया है। सदस्य देशों ने एक ऐसे एकीकृत डिजिटल भुगतान ढाँचे की शुरुआत कर दी है, जो सीधे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर और पश्चिमी देशों के 'SWIFT' सिस्टम की निर्भरता को खत्म कर देगा।

पश्चिमी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, यह डिजिटल सिस्टम ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है और इसमें सदस्य देशों की राष्ट्रीय डिजिटल मुद्राओं को सीधे जोड़ा गया है। इससे अब रूस, चीन, ब्राजील और अन्य सदस्य देश बिना किसी तीसरे देश की मुद्रा का उपयोग किए आपस में अरबों डॉलर का व्यापार कर सकेंगे। इस कदम ने वाशिंगटन और यूरोपीय संघ के वित्तीय गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

डॉलर के वैश्विक प्रभुत्व को वर्षों से अमेरिका का सबसे बड़ा हथियार माना जाता रहा है, जिसके जरिए वह अन्य देशों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाता था। लेकिन इस नए विकल्प के आने से अमेरिकी प्रतिबंधों का असर बेअसर होने लगा है। कई विकासशील देश अब डॉलर के बजाय इस नए सिस्टम से जुड़ने के लिए कतार में खड़े हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय वित्त का संतुलन पूरी तरह बदल रहा है।  

भारतीय परिपेक्ष्य में, यह कदम अत्यधिक संवेदनशील और रणनीतिक महत्व का है। भारत हमेशा से किसी एक ध्रुव या एक मुद्रा पर अत्यधिक निर्भरता का विरोधी रहा है। भारत अपने 'UPI' और डिजिटल रुपये (e-Rupee) को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दे रहा है। ब्रिक्स के इस नए सिस्टम में भारत अपनी शर्तों पर शामिल हो रहा है ताकि उसकी अपनी आर्थिक संप्रभुता पर कोई आंच न आए।  

भारत की स्पष्ट नीति है कि वह डॉलर को पूरी तरह खारिज करने के बजाय एक 'बहु-मुद्रा व्यापार प्रणाली' का समर्थन करता है, जहाँ भारतीय रुपया मजबूत हो सके। रूस के साथ रुपये-रूबल में व्यापार और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ स्थानीय मुद्रा में तेल खरीदकर भारत पहले ही यह साबित कर चुका है कि अपनी मुद्रा को कैसे अंतरराष्ट्रीय बनाया जाता है।

भारत का यह संतुलित दृष्टिकोण उसे ब्रिक्स के भीतर चीन के अत्यधिक दबदबे को रोकने में भी मदद करता है। भारतीय वित्त मंत्रालय और आरबीआई (RBI) इस नए तंत्र के जरिए यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भारतीय निर्यातकों को बिना किसी पश्चिमी प्रतिबंध के खतरा मुक्त वैश्विक बाजार मिल सके। यह कदम भारत की आर्थिक आजादी को एक नए स्तर पर ले जा रहा है।  

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