अमेरिकी राजनीति में इन दिनों एक नया भूचाल आया हुआ है। जैसे-जैसे अमेरिका में मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) नजदीक आ रहे हैं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की विदेश नीति को लेकर संसद से लेकर सड़कों तक भारी विरोध देखने को मिल रहा है। वाशिंगटन का पूरा ध्यान अब दक्षिण अमेरिका, विशेष रूप से ब्राजील और क्यूबा के राजनीतिक परिदृश्य में सीधे हस्तक्षेप करने पर टिक गया है।
विदेशी न्यूज पोर्टल्स के मुताबिक, ब्राजील में आगामी चुनावों को प्रभावित करने के अमेरिकी प्रयासों पर ब्राजील के अटॉर्नी जनरल ने सख्त आपत्ति जताई है और इसे अपनी संप्रभुता का हनन करार दिया है। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी तटरक्षक बल द्वारा क्यूबा जा रहे ईंधन जहाजों को समुद्र में रोकने की घटनाओं ने लैटिन अमेरिका में भारी जनाक्रोश पैदा कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन अपने आंतरिक राजनीतिक फायदों के लिए सख्त रुख अपना रहा है।
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की बड़ी छंटनी की योजनाओं ने भी अंदरूनी राजनीति को गर्मा दिया है। शीर्ष कमान में फेरबदल और नीतियों में आक्रामक बदलाव के चलते अमेरिकी सेना के भीतर भी असंतोष की लहर है। इस आंतरिक खींचतान और विदेशी विवादों ने वाशिंगटन के वैश्विक नेतृत्व पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारत के लिए अमेरिका की यह आंतरिक और क्षेत्रीय राजनीति काफी मायने रखती है। भारत अमेरिका का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार है, लेकिन अमेरिका का ध्यान जैसे ही अपनी घरेलू राजनीति या लैटिन अमेरिकी विवादों में उलझता है, उसका असर वैश्विक रणनीतिक प्राथमिकताओं पर पड़ता है। भारत बहुत बारीकी से देख रहा है कि वाशिंगटन का यह नया राजनीतिक रुख भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार और रक्षा समझौतों को कैसे प्रभावित करता है।
भारतीय कूटनीतिज्ञों का हमेशा से मानना रहा है कि किसी भी देश की आंतरिक संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए। ब्राजील, जो कि ब्रिक्स और IBSA में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है, उसके साथ अमेरिकी तनातनी पर नई दिल्ली की सतर्क नजर है। भारत चाहता है कि अमेरिका अपना ध्यान भारत-प्रशांत (Indo-Pacific) की सुरक्षा पर केंद्रित रखे, न कि क्षेत्रीय उलझनों में ऊर्जा नष्ट करे।
भारत अपनी विदेश नीति को अमेरिका के राजनीतिक उतार-चढ़ाव से पूरी तरह सुरक्षित रख रहा है। वाशिंगटन में कोई भी सत्ता में रहे या कोई भी राजनीतिक घमासान चले, भारत अपनी स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को सर्वोपरि रखते हुए वैश्विक मंच पर अपने हित साधने में जुटा हुआ है।
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