वैश्विक राजनीति के गलियारों से आम जनता के पेट से जुड़ी एक बेहद डरावनी खबर आ रही है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि दुनिया एक भयंकर 'खाद्य संकट' (Major Food Crisis) के मुहाने पर खड़ी है। यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व (खाड़ी देशों) में बढ़ते कूटनीतिक और सैन्य तनाव के कारण रासायनिक उर्वरकों (Fertilisers) की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है।
रूस और बेलारूस, जो दुनिया के सबसे बड़े पोटाश और नाइट्रोजन आधारित उर्वरक निर्यातक हैं, उन पर लगे प्रतिबंधों और समुद्री मार्गों की नाकेबंदी ने स्थिति को बेहद नाजुक बना दिया है। इसके साथ ही लाल सागर में जहाजों पर हो रहे हमलों के कारण उर्वरकों का परिवहन बेहद महंगा और मुश्किल हो गया है। खाद की कमी के कारण दुनिया भर में फसलों की उपज पर बुरा असर पड़ रहा है, जिससे आने वाले महीनों में अनाज की कीमतें आसमान छूने वाली हैं।
विकासशील और गरीब देश (Global South) इस संकट की सबसे पहली और सबसे बड़ी बलि चढ़ रहे हैं। अफ्रीका और एशिया के कई देशों में किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही है। यदि समय रहते इस आपूर्ति श्रृंखला को ठीक नहीं किया गया, तो दुनिया के कई हिस्सों में भुखमरी और राजनीतिक अस्थिरता फैलने का खतरा पैदा हो गया है।
भारत के दृष्टिकोण से, 1.4 अरब की आबादी वाले देश के लिए खाद्य सुरक्षा बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारतीय कृषि क्षेत्र को उर्वरकों की भारी आवश्यकता होती है। इस वैश्विक संकट को देखते हुए भारत सरकार ने अग्रिम रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है और रूस, सऊदी अरब, मोरक्को तथा कनाडा के साथ दीर्घकालिक उर्वरक आयात समझौते सुरक्षित कर लिए हैं।
भारत अपने घरेलू उर्वरक कारखानों (जैसे नीम-कोटेड यूरिया और नैनो-यूरिया) के उत्पादन को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा रहा है ताकि विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम की जा सके। भारत के वित्त मंत्रालय और कृषि मंत्रालय मिलकर किसानों को उर्वरक सब्सिडी प्रदान कर रहे हैं ताकि वैश्विक कीमतों में उछाल का असर भारतीय किसान और उपभोक्ता की जेब पर न पड़े।
विदेश मंत्री जयशंकर का यह बयान ग्लोबल साउथ के लिए भारत के नेतृत्व का एक प्रतीक है। भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह आवाज उठा रहा है कि खाद्य और ईंधन को कभी भी वैश्विक युद्ध का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत अपनी खाद्य सुरक्षा को अभेद्य बनाते हुए अन्य मित्र देशों को भी अनाज निर्यात करने की क्षमता बनाए हुए है।
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