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ताइवान पर चीन का घेराव

एशियाई महाद्वीप के पूर्वी छोर पर स्थित सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील ताइवान जलडमरूमध्य में आज तनाव का पारा अपने सर्वोच्च बिंदु पर पहुंच गया है। चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने ताइवान की मुख्य भूमि के चारों तरफ अचानक इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा, खौफनाक और आक्रामक संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
10 Oct 2026
Solar farm during sunset

एशियाई महाद्वीप के पूर्वी छोर पर स्थित सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील ताइवान जलडमरूमध्य में आज तनाव का पारा अपने सर्वोच्च बिंदु पर पहुंच गया है। चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने ताइवान की मुख्य भूमि के चारों तरफ अचानक इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा, खौफनाक और आक्रामक संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जिसमें दर्जनों परमाणु पनडुब्बियों, विध्वंसक युद्धपोतों और स्टील्थ फाइटर जेट्स ने ताइवान की समुद्री सीमाओं को पूरी तरह घेर लिया है। बीजिंग ने ताइवान की स्वतंत्रता समर्थक ताकतों को चेतावनी देते हुए इसे "अंतिम और निर्णायक सैन्य संदेश" करार दिया है।

ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने आपातकालीन रेड अलर्ट जारी करते हुए अपनी मिसाइल डिफेंस यूनिट्स को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है और द्वीप के नागरिकों से किसी भी आकस्मिक हवाई या नौसैनिक हमले के लिए बंकरों में तैयार रहने की अपील की है। अमेरिकी प्रशासन ने चीन की इस हरकत को अत्यधिक गैर-जिम्मेदाराना और क्षेत्रीय शांति को तहस-नहस करने वाला बताया है, और अमेरिकी नौसेना के एक विशाल विमानवाहक पोत को ताइवान के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में गश्त के लिए दौड़ा दिया है। इस महायुद्ध जैसे हालातों के कारण दक्षिण चीन सागर से गुजरने वाले तमाम कमर्शियल जहाजों की आवाजाही ठप पड़ गई है।

मानवीय और आर्थिक दृष्टिकोण से सोचिए कि यदि इस समुद्री जलडमरूमध्य में जरा सी भी चिंगारी भड़की, तो दुनिया भर की अर्थव्यवस्था कुछ ही घंटों में ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगी। ताइवान वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर चिप्स (Semiconductors) और अत्याधुनिक माइक्रोचिप्स का दिल माना जाता है। यहाँ एक भी मिसाइल गिरने का मतलब है दुनिया भर के ऑटोमोबाइल, स्मार्टफोन, मेडिकल उपकरण और आईटी उद्योगों का पूरी तरह ठप हो जाना। युद्ध के इन बादलों के बीच ताइवान के 2 करोड़ 30 लाख लोग हर पल खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं।

भारतीय परिप्रेक्ष्य से देखा जाए तो ताइवान के पास मंडराता यह चीनी सैन्य संकट नई दिल्ली के लिए बहुत बड़ी रणनीतिक और आर्थिक चिंता का विषय है। चिप्स की सप्लाई टूटने से भारत के मेक इन इंडिया और डिजिटल सेक्टर को भारी झटका लग सकता है। भारत ने क्वाड (QUAD) के अपने साझीदारों के साथ मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता और शांति बनाए रखने का कड़ा संदेश दिया है। भारत कभी नहीं चाहेगा कि चीन की विस्तारवादी नीतियां इस समुद्री मार्ग को अपने कब्जे में लेकर एशिया की आर्थिक प्रगति को बंधक बनाएं।

यह संकट इस कड़वी सच्चाई को उजागर करता है कि 21वीं सदी का अगला संभावित महायुद्ध किसी यूरोपीय सीमा पर नहीं, बल्कि एशिया-प्रशांत के इसी समुद्री रास्ते पर लड़ा जा सकता है। विस्तारवादी तानाशाही और लोकतांत्रिक अस्मिता के बीच की यह आर-पार की लड़ाई ग्लोबल सप्लाई चेन और वैश्विक शांति के लिए एक नासूर बनती जा रही है। भारत जैसी तेजी से उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति के लिए यह सबक है कि वह देश के भीतर ही सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को युद्ध स्तर पर बढ़ावा दे।  

आने वाले दिन ताइवान जलडमरूमध्य के भविष्य और वैश्विक शांति के लिए अत्यंत निर्णायक साबित होने वाले हैं। चीन के आक्रामक तेवर और अमेरिका की नौसैनिक घेराबंदी के बीच फंसा यह छोटा सा द्वीप आज पूरी दुनिया की धड़कनों को तेज किए हुए है। यदि कूटनीति के तमाम रास्ते बंद हो गए, तो यह सैन्य अभ्यास कब एक वास्तविक और विनाशकारी युद्ध में बदल जाएगा, इसका अंदाजा लगाना भी किसी के लिए डरावना हो सकता है।

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