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लाल सागर में भड़का महासंग्राम

यमन की सुलगती सरजमीं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की रीढ़ कहे जाने वाले लाल सागर के समुद्री जलमार्गों पर एक बार फिर से बेहद खौफनाक और भीषण युद्ध की लपटें उठने लगी हैं। सऊदी अरब की अगुवाई वाले शक्तिशाली सैन्य गठबंधन ने यमन के अंदर ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ और बड़े पैमाने पर हवाई एवं रणनीतिक हमले शुरू कर दिए हैं।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
10 Oct 2026
Solar farm during sunset

यमन की सुलगती सरजमीं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की रीढ़ कहे जाने वाले लाल सागर के समुद्री जलमार्गों पर एक बार फिर से बेहद खौफनाक और भीषण युद्ध की लपटें उठने लगी हैं। सऊदी अरब की अगुवाई वाले शक्तिशाली सैन्य गठबंधन ने यमन के अंदर ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ और बड़े पैमाने पर हवाई एवं रणनीतिक हमले शुरू कर दिए हैं। यह आक्रामक सैन्य कार्रवाई हाल ही में हूथी विद्रोहियों द्वारा सऊदी सीमावर्ती बुनियादी ढांचों और लाल सागर से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय मालवाहक जहाजों पर दागी गई खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों के सीधे जवाब में की गई है।

संयुक्त राष्ट्र के यमन मामलों के विशेष दूत हांस ग्रुंडबर्ग ने इस बिगड़ती हुई भयावह स्थिति पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए औपचारिक रूप से चेतावनी जारी की है कि यमन का यह क्षेत्र एक बार फिर "पूर्ण-स्तरीय युद्ध" (Full-scale war) के मुहाने पर आ खड़ा हुआ है। इस सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तमाम कमर्शियल जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है, जिसके चलते दुनिया भर की प्रमुख शिपिंग कंपनियों में भारी अफरा-तफरी मच गई है और उन्होंने अपने जहाजों को रोक दिया है।

भारत के अंतरराष्ट्रीय आयात-निर्यात और विदेशी व्यापार के लिए लाल सागर में छिड़ी यह जंग एक विकराल आर्थिक चुनौती बनकर सामने आई है। यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीकी देशों को भेजे जाने वाले भारतीय निर्यातकों के माल को अब मजबूरन अफ्रीका महाद्वीप का लंबा चक्कर काटकर 'केप ऑफ गुड होप' के रास्ते से भेजना पड़ रहा है, जिससे माल ढुलाई (Freight) का भारी खर्च और शिपिंग का समय दोनों ही कई गुना बढ़ गए हैं। भारतीय नौसेना ने इस अति-संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में अपने युद्धपोतों की गश्त और निगरानी को और अधिक कड़ा कर दिया है ताकि भारतीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

यह संकट एक बार फिर इस बात की गवाही देता है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं कितनी नाजुक स्थिति से गुजर रही हैं। क्षेत्रीय प्रॉक्सी युद्ध और गैर-राज्य अभिनेताओं द्वारा अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों को बंधक बनाए जाने की प्रवृत्ति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरे खतरे में डाल दिया है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए, जिसकी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग के जरिए होने वाले व्यापार पर निर्भर है, लाल सागर की यह अशांति मुद्रास्फीति और व्यापार घाटे दोनों के मोर्चे पर गहरी चिंता का विषय बनी हुई है, जिस पर सरकार और नौसेना दोनों की पैनी नजर है।

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