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होर्मुज की जंग

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास सैन्य तनाव अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी मिडटर्म चुनावों की सुगबुगाहट के बीच वाशिंगटन और तेहरान के बीच व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की नाकेबंदी को लेकर सीधी तनातनी

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
11 Oct 2026
Solar farm during sunset

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास सैन्य तनाव अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी मिडटर्म चुनावों की सुगबुगाहट के बीच वाशिंगटन और तेहरान के बीच व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की नाकेबंदी को लेकर सीधी तनातनी हो गई है। खाड़ी देशों में बढ़ते टकराव और यमन के हूती विद्रोही अभियानों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह चरमरा गई है। कच्चा तेल वैश्विक बाजारों में 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर चुका है, जिससे दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में हड़कंप मच गया है।  

वैश्विक वित्तीय बाजार इस सैन्य संकट की तल्खी को साफ महसूस कर रहे हैं। वॉल स्ट्रीट से लेकर एशियाई बाजारों तक में तेल की कीमतों के उछाल के कारण मुद्रास्फीति का नया खौफ पैदा हो गया है। जहाजों का बीमा प्रीमियम कई गुना बढ़ चुका है और वैश्विक शिपिंग कंपनियां अब लाल सागर तथा फारस की खाड़ी के बजाय लंबे और खर्चीले समुद्री रास्तों का सहारा लेने को मजबूर हैं।  

अमेरिका और इज़राइल द्वारा उठाए गए कड़े सैन्य कदमों ने ईरान को हाइब्रिड वॉरफेयर और साइबर हमलों की रणनीति तेज करने पर मजबूर कर दिया है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन केंद्र पर लटकी इस तलवार ने साफ कर दिया है कि अगर यह समुद्री रास्ता पूरी तरह से बंद हुआ, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था महामंदी के दौर में धकेली जा सकती है।

इधर वाशिंगटन में राजनीतिक दबाव तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिकी प्रशासन एक तरफ कड़ा रुख दिखाने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों के चलते घरेलू मोर्चे पर भारी आलोचना झेल रहा है। ईरान ने भी कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि किसी भी प्रत्यक्ष आक्रमण का अंजाम पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक देगा।  

अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर संयुक्त राष्ट्र और तटस्थ देश इस संकट का हल निकालने की कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दोनों ही पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। आने वाले कुछ दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।  

भारतीय परिपेक्ष्य:

भारत के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती पेश करती है। भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से अधिकांश इसी रास्ते से आता है। तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार जाने से भारत का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ेगा और देश में पेट्रोल-डीजल व एलपीजी की कीमतें बढ़ने का सीधा खतरा पैदा हो जाएगा, जिससे घरेलू महंगाई दर को बड़ा झटका लग सकता है। रणनीतिक रूप से भारत के लिए खाड़ी देशों में रह रहे करीब 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा और विदेश नीति में सधा हुआ संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है।

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