प्लास्टिक कचरे की विकराल होती समस्या से निपटने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) ने अपनी साझेदारी का विस्तार किया है। इस 7 साल के रणनीतिक समझौते के तहत देश के 50 प्रमुख शहरों में प्लास्टिक रिसाइकलिंग के ढांचे को मजबूत किया जाएगा। यह साझेदारी न केवल शहरों को प्लास्टिक कचरे से मुक्ति दिलाने का प्रयास करेगी, बल्कि 'सर्कुलर इकोनॉमी' (वृत्तीय अर्थव्यवस्था) की अवधारणा को जमीनी स्तर पर साकार करने में भी एक उत्प्रेरक का काम करेगी।
इस पूरी परियोजना के केंद्र में हमारे 'सफाई मित्र' यानी कचरा बीनने वाले और सफाई कर्मचारी हैं। इस विस्तारित कार्यक्रम के माध्यम से 50 शहरों में कार्यरत हजारों सफाई मित्रों को औपचारिक पहचान, कौशल प्रशिक्षण और बेहतर आजीविका के अवसर प्रदान किए जाएंगे। उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य बीमा, और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर सामाजिक सुरक्षा का एक मजबूत कवच दिया जाएगा। हाशिए पर जीवन जीने वाले इन अनसंग हीरो (कचरा बीनने वालों) को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाना इस पहल का प्रमुख मानवीय पहलू है।
प्लास्टिक रिसाइकलिंग के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए इस साझेदारी के तहत अत्याधुनिक 'मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी' (MRF) और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। इसके जरिए सूखे कचरे और प्लास्टिक को उसके स्रोत पर ही अलग करने और उसे रिसाइकलिंग प्लांट तक सुरक्षित ढंग से पहुंचाने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जाएगा। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद से प्लास्टिक कचरे के एक-एक टुकड़े को ट्रैक करना संभव होगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कचरा लैंडफिल या नदियों में डंप होने के बजाय पुनः उपयोग में लाया जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन और नगर निगमों के साथ मिलकर चलाया जाने वाला यह अभियान शहरी स्वच्छता प्रबंधन के मॉडल को बदलने की क्षमता रखता है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र का यह अनूठा सहयोग (Public-Private-Community Partnership) शहरों में ठोस कचरा प्रबंधन के लिए एक टिकाऊ ढांचा तैयार करेगा। इसके साथ ही, स्थानीय समुदायों और नागरिकों को भी प्लास्टिक का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने और कचरा अलग-अलग करने के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
निष्कर्षतः, UNDP और HUL का यह 7 साल का समझौता भारत के 'स्वच्छ भारत मिशन' और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने की दिशा में एक मील का पत्थर है। यह पहल साबित करती है कि जब वैश्विक संस्थाएं और कॉरपोरेट जगत एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक उत्थान भी संभव है। यदि 50 शहरों का यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में यह न केवल पूरे भारत के लिए बल्कि अन्य विकासशील देशों के लिए भी प्लास्टिक कचरा प्रबंधन का एक बेहतरीन खाका साबित होगा।