विज्ञान और खगोलशास्त्र के क्षेत्र में नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने एक हैरान कर देने वाली खोज की है। वैज्ञानिकों ने नेप्च्यून ग्रह के आंतरिक चंद्रमाओं (Larissa और Galatea) और उसके छल्लों में मैग्नीशियम-समृद्ध खनिजों की मौजूदगी दर्ज की है, जो प्राचीन काल में जल की उपस्थिति की ओर इशारा करते हैं।
इस खोज से यह सिद्धांत मजबूत हुआ है कि नेप्च्यून का मूल उपग्रह मंडल किसी विशाल खगोलीय टक्कर के कारण नष्ट हो गया था। इस नए खुलासे ने हमारे सौर मंडल के बाहरी ग्रहों की उत्पत्ति के रहस्यों को सुलझाने की दिशा में नया मोड़ ला दिया है।
वहीं, पृथ्वी पर अंटार्कटिका में स्थित 'आइसक्यूब' (IceCube) न्यूट्रिनो वेधशाला ने ब्रह्मांड के सुदूर कोनों से आने वाले न्यूट्रिनो कणों के नए संकेतों को रिकॉर्ड किया है। न्यूक्लियर रिएक्टर्स के बंद होने के बाद भी निकलने वाले न्यूट्रिनो की पहचान करने में भारतीय और वैश्विक वैज्ञानिकों को सफलता मिली है।
भारतीय मानव माइक्रोबायोम पहल (Indian Human Microbiome Initiative) के तहत किए गए शोध में यह पाया गया है कि विभिन्न जनजातीय समुदायों के खान-पान और भूगोल के अनुसार उनके गट बैक्टिरिया में भिन्नता पाई जाती है, जो भविष्य की दवाओं के निर्माण में क्रांतिकारी साबित होगी।
विज्ञान की ये नई खोजें न केवल ब्रह्मांड के रहस्यों को खोल रही हैं, बल्कि मानव स्वास्थ्य और भविष्य की तकनीकों के लिए नए दरवाजे भी खोल रही हैं।