पूर्वी यूरोप के आसमान में अचानक रात के अंधेरे में उड़े अज्ञात ड्रोनों ने नाटो (NATO) के रडार सिस्टम को हिलाकर रख दिया है। पोलैंड और रोमानिया की हवाई सीमाओं के ठीक ऊपर रूस निर्मित ड्रोनों की घुसपैठ और उसके बाद हुए भीषण धमाकों ने पूरे यूरोपीय महाद्वीप में इमरजेंसी जैसी स्थिति पैदा कर दी है। नाटो मुख्यालय ब्रसेल्स में रक्षा मंत्रियों की आपातकालीन बैठक बुलाई गई है, जहाँ यह तय किया जा रहा है कि इस घुसपैठ को नाटो के 'अनुच्छेद 5' (Article 5) के तहत सीधा सैन्य हमला माना जाए या नहीं।
रूस की ओर से इस घटना पर आई प्रतिक्रिया ने आग में घी डालने का काम किया है। मॉस्को ने इसे अपनी सीमा के पास नाटो की बढ़ती सैन्य उकसावेबाजी का नतीजा बताया है। वहीं, अमेरिका ने तुरंत अपने एडवांस्ड 'स्टेल्थ फाइटर जेट्स' को नाटो के पूर्वी मोर्चे पर गश्त के लिए रवाना कर दिया है। हवा में मंडराते लड़ाकू विमानों की गर्जना से सीमावर्ती इलाकों के निवासियों में दहशत का माहौल है और लोग सुरक्षित ठिकानों की ओर भाग रहे हैं।
इस घटनाक्रम ने वैश्विक शेयर बाजारों को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया है। यूरोपीय यूनियन की अर्थव्यवस्था जो पहले से ही ऊर्जा संकट से जूझ रही थी, इस नए सैन्य तनाव के कारण पूरी तरह से अनिश्चितता के भंवर में फंस गई है। अगर नाटो और रूस के बीच सीधा सैन्य टकराव शुरू होता है, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह ठप्प हो जाएगी और दुनिया एक विनाशकारी महायुद्ध के मुहाने पर खड़ी हो जाएगी।
भारत के लिए नाटो-रूस सीमा पर भड़का यह नया तनाव कूटनीतिक कसौटी की सबसे बड़ी परीक्षा है। भारत ने हमेशा शांतिपूर्ण संवाद का समर्थन किया है, लेकिन यदि यह संघर्ष एक पूर्ण यूरोपीय युद्ध में बदलता है, तो भारत के रूस से मिलने वाले सस्ते कच्चे तेल और रक्षा उपकरणों की आपूर्ति पर सीधा असर पड़ेगा। भारत को अपनी रणनीतिक जरूरतों और पश्चिमी देशों के साथ अपने प्रगाढ़ संबंधों के बीच एक बेहद नाजुक संतुलन बनाना होगा।
आर्थिक मोर्चे पर, यूरोप में युद्ध का भड़कना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निर्यात के नए संकट खड़े कर सकता है। भारतीय आईटी सेक्टर, टेक्सटाइल और ऑटो पार्ट्स के निर्यात पर बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि यूरोपीय बाजार में मंदी गहराने का खतरा बढ़ जाएगा। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और सोने के दामों में आई अचानक उछाल भारतीय बाजार में महंगाई को तेजी से बढ़ा सकती है।
नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद बारीकी से नजर बनाए हुए है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने दोनों पक्षों से तत्काल युद्धविराम और कूटनीतिक बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है। भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह किसी भी सैन्य गुट का हिस्सा बनने के बजाय शांति का पक्षधर रहेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक निष्पक्ष और जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में भारत की साख और मजबूत हुई है।
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