संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की उच्चस्तरीय बैठक के अंतरराष्ट्रीय मंच से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने भारत के खिलाफ बेहद तीखा और उकसावे वाला बयान दिया है। उन्होंने खुले मंच से धमकी दी कि यदि भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के तहत पाकिस्तान की ओर जाने वाली नदियों के पानी के बहाव में कोई रुकावट, बदलाव या मोड़ उत्पन्न करने की कोशिश की, तो इस्लामाबाद इसे सीधा 'युद्ध की कार्रवाई' (Act of War) मानेगा। इस सीधे सैन्य बयानबाज़ी ने दक्षिण एशिया के कूटनीतिक गलियारों में एक नया भूचाल ला दिया है।
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पाकिस्तान की ओर से आई यह अप्रत्याशित सैन्य धमकी ऐसे समय में आई है जब इस्लामाबाद खुद भीषण आंतरिक आर्थिक संकट, मुद्रास्फीति और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। जल संसाधनों को लेकर की गई इस उग्र बयानबाज़ी के पीछे का असली मकसद अपनी घरेलू विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाना माना जा रहा है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंच का इस्तेमाल करके भारत पर दबाव बनाने की यह चाल पाकिस्तान के लिए उलटी भी पड़ सकती है।
सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों का जल बंटवारा दशकों से दोनों देशों के बीच एक नाजुक मुद्दा रहा है। भारत द्वारा हाल के वर्षों में अपनी सीमा के भीतर जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण और जल संचयन क्षमता में सुधार करने की रणनीतिक पहलों ने पाकिस्तान की नींद उड़ा रखी है। पाकिस्तान को डर है कि भारत नदियों के पानी के रुख को मोड़कर उसके कृषि क्षेत्र को पूरी तरह पंगु बना सकता है, जिससे उसकी खाद्य सुरक्षा पर सीधा खतरा पैदा हो जाएगा।
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भारतीय परिप्रेक्ष्य में, पाकिस्तान की इस 'एक्ट ऑफ वॉर' वाली धमकी को नई दिल्ली ने पूरी तरह से आधारहीन और बौखलाहट में दिया गया बयान करार दिया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से करारा जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि जो देश खुद आतंकवाद की पौधशाला बने हुए हैं और सीमाओं के पार अस्थिरता फैलाते हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय संधियों का पाठ पढ़ाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने संप्रभु अधिकारों और अपनी राष्ट्रीय जल सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।
सामरिक दृष्टि से भारत का रुख बेहद स्पष्ट है कि आतंकवाद और प्रायोजित हिंसा के साये में किसी भी द्विपक्षीय वार्ता या संधि के पुराने स्वरूप को यथावत नहीं रखा जा सकता। भारत की नई नीति के तहत अपनी नदियों के पानी का अधिकतम उपयोग अपने नागरिकों और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर तथा पंजाब के किसानों के हित में करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। पाकिस्तान अगर जल मुद्दे को सैन्य टकराव का बहाना बनाता है, तो भारत की तीनों सेनाएं किसी भी दुस्साहस का माकूल जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
कूटनीतिक स्तर पर, भारत ने वैश्विक समुदाय के सामने पाकिस्तान की इस अनर्गल बयानबाज़ी की पोल खोल दी है। भारत ने यह रेखांकित किया है कि दूर-दराज के क्षेत्रों में युद्ध और तनाव फैलाने वाले देश पूरी दुनिया की आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक शांति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। भारत की यह स्पष्ट और निर्भीक विदेश नीति यह दर्शाती है कि वह किसी भी प्रकार की गीदड़भभकी के आगे घुटने टेकने के बजाय अपनी शर्तों पर क्षेत्रीय सुरक्षा और संप्रभुता को अक्षुण्ण रखने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है।
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