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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो पर ऐतिहासिक जंग: भारत की स्थाई सदस्यता का नया रास्ता!

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय न्यूयॉर्क से एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक खबर आ रही है, जहाँ सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों और 'वीटो पावर' के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक अभूतपूर्व प्रस्ताव पर बहस छिड़ गई है।

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
01 Oct 2026
Solar farm during sunset

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय न्यूयॉर्क से एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक खबर आ रही है, जहाँ सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों और 'वीटो पावर' के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक अभूतपूर्व प्रस्ताव पर बहस छिड़ गई है। फ्रांस और ब्रिटेन जैसे स्थाई सदस्यों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उस घोषणापत्र का समर्थन किया है, जिसके तहत सामूहिक नरसंहार और बड़े युद्ध अपराधों के मामलों में स्थाई सदस्यों के 'वीटो' अधिकार को निलंबित करने की मांग की गई है।  

इस ऐतिहासिक पहल के बाद सुरक्षा परिषद के दो अन्य महाशक्तियों - रूस और चीन - के रुख में भारी बौखलाहट देखी जा रही है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बने इस वैश्विक ढांचे में पहली बार वीटो पावर के असीमित इस्तेमाल पर सीधी कानूनी और नैतिक रोक लगाने की तैयारी चल रही है। अफ्रीकी, लैटिन अमेरिकी और एशियाई देशों का एक बड़ा गुट अब वीटो व्यवस्था को खत्म करने या सुरक्षा परिषद का विस्तार कर नए देशों को इसमें शामिल करने के लिए दबाव बना रहा है।

वैश्विक मंच पर यह विवाद इसलिए भी गहरा गया है क्योंकि मौजूदा सुरक्षा परिषद दुनिया के कई बड़े संघर्षों को रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के अधिकांश देशों ने कहा है कि 1945 के पुराने नियमों से 21वीं सदी की बहुध्रुवीय दुनिया को नहीं चलाया जा सकता। इस कूटनीतिक घमासान ने संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता और उसके अस्तित्व पर ही एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है।

भारतीय परिपेक्ष्य में, सुरक्षा परिषद में यह वीटो सुधार की बहस भारत के लिए दशकों पुराने अधिकार और न्याय का मार्ग प्रशस्त करने वाली है। भारत लंबे समय से UNSC में स्थाई सदस्यता की पुरजोर मांग कर रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी, मजबूत अर्थव्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में सबसे बड़े योगदानकर्ता के रूप में भारत का दावा अब और मजबूत हो गया है।

यदि वीटो शक्ति पर अंकुश लगाने और स्थायी सीटों का विस्तार करने पर सहमति बनती है, तो भारत के लिए वीटो-बाधित रास्ते खुल सकते हैं, जिसे अब तक चीन अपनी अड़ंगेबाज़ी से रोकता आया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि बहुपक्षवाद (Multilateralism) को बचाने का एकमात्र तरीका UNSC में भारत, ब्राजील, जापान और अफ्रीकी देशों को स्थाई सीट देना है।

संक्षेप में, संयुक्त राष्ट्र में चल रही यह कूटनीतिक जंग वैश्विक शक्ति संतुलन की एक नई पटकथा लिख रही है। सुरक्षा परिषद के सुधारों पर अगर दुनिया एकमत होती है, तो यह भारत को वैश्विक निर्णयों की अग्रिम पंक्ति में लाकर खड़ा कर देगा, जिससे भारत की विदेश नीति को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।  

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