पनामा में आयोजित वैश्विक रासायनिक सुरक्षा महासम्मेलन (Global Congress on Chemical Security) में 110 से अधिक देशों के सुरक्षा विशेषज्ञों और इंटरपोल (INTERPOL) ने एक बहुत ही भयावह और चौकाने वाली चेतावनी जारी की है। सम्मेलन में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय उग्रवादी गुट और असंगठित हिंसक समूह अब एआई (AI) और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की कमियों का फायदा उठाकर 'रासायनिक हथियारों' (Chemical Weapons) और जहरीले पदार्थों को नया हथियार बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
इंटरपोल के महानिदेशक और वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि कोई भी अकेला देश इस उभरते हुए रासायनिक आतंकवाद (Chemical Terrorism) के खतरे से अकेले नहीं निपट सकता। इस सम्मेलन में यह सामने आया कि संगठित अपराध गिरोह और उग्रवादी, डार्क वेब और ब्लैक मार्केट के माध्यम से औद्योगिक रसायनों तक आसानी से पहुंच बना रहे हैं। इसके जवाब में इंटरपोल ने खतरे की पूर्व सूचना देने के लिए विशेष 'ऑरेंज' और 'पर्पल' नोटिस जारी करने और अंतरराष्ट्रीय खुफिया साझाकरण को दोगुना करने का निर्णय लिया है।
इस सम्मेलन में अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा की रक्षा एजेंसियों ने भी भाग लिया और सहमति जताई कि वैश्विक केमिकल सप्लाई चेन (Chemical Supply Chain) की निगरानी के लिए अब एआई-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम लागू करना अनिवार्य हो गया है। यदि यह रासायनिक खतरे समय रहते नहीं रोके गए, तो दुनिया के किसी भी बड़े शहर में एक छोटा सा रासायनिक रिसाव या हमला लाखों लोगों की जान ले सकता है और वैश्विक स्तर पर अराजकता फैला सकता है।
भारतीय परिपेक्ष्य में, इंटरपोल की यह चेतावनी भारत की आंतरिक और तटीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत दुनिया का एक बड़ा रासायनिक और फार्मास्युटिकल विनिर्माण हब (Chemical & Pharma Hub) है। ऐसे में देश के भीतर रासायनिक कारखानों की सुरक्षा, कच्चे माल के आयात-निर्यात पर सख्त निगरानी और जहरीले रसायनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत के लिए शीर्ष प्राथमिकता है।
भारत का 'राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण' (NDMA) और सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (CBRN) खतरों से निपटने के लिए प्रोटोकॉल तैयार करती रही हैं। इंटरपोल के इस नए इंटेलिजेंस नेटवर्क से जुड़कर भारत को सीमा पार से होने वाली किसी भी संभावित रासायनिक साजिश या स्मगलिंग को समय रहते रोकने में बड़ी मदद मिलेगी।
संक्षेप में, 21वीं सदी में आतंकवाद का स्वरूप लगातार बदल रहा है और रासायनिक हथियार इसका सबसे खौफनाक रूप बन सकते हैं। 110 देशों का एक मंच पर आना यह दिखाता है कि वैश्विक शांति के लिए सामूहिक सुरक्षा कितनी जरूरी है। भारत को अपनी औद्योगिक सुरक्षा नीतियों को और अधिक चाक-चौबंद बनाते हुए इस वैश्विक लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभानी होगी।
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