Cult Current
राजनीति

एआई हथियारों पर जिनेवा में महाशक्तियों का गतिरोध: स्वायत्त ड्रोन्स पर पाबंदी खारिज!

जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र के उच्च स्तरीय सम्मेलन में उस समय भारी निराशा छा गई जब 'ऑटोनॉमस वेपन्स सिस्टम्स' यानी बिना मानवीय हस्तक्षेप के खुद लक्ष्य तय करके हमला करने वाले कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) संचालित हथियारों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव गिर गया। अमेरिका, चीन और रूस जैसी प्रमुख सैन्य

कल्ट करंट डेस्क
कल्ट करंट डेस्क
01 Oct 2026
Solar farm during sunset

जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र के उच्च स्तरीय सम्मेलन में उस समय भारी निराशा छा गई जब 'ऑटोनॉमस वेपन्स सिस्टम्स' यानी बिना मानवीय हस्तक्षेप के खुद लक्ष्य तय करके हमला करने वाले कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) संचालित हथियारों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव गिर गया। अमेरिका, चीन और रूस जैसी प्रमुख सैन्य महाशक्तियों ने इस वैश्विक संधि (Global AI Arms Treaty) पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया, जिससे एआई-संचालित घातक हथियारों की खुली रेस शुरू हो गई है।

सम्मेलन के दौरान मानवाधिकार संगठनों और शांतिप्रिय देशों ने चेतावनी दी थी कि बिना इंसान की निगरानी के काम करने वाले किलर ड्रोन्स और रोबोटिक हथियार युद्ध के मैदान में भयानक तबाही ला सकते हैं। हालांकि, महाशक्तियों का तर्क था कि एआई हथियार युद्ध में मानवीय गलतियों को कम करते हैं और सटीक निशाना लगाते हैं। संधि वार्ता के विफल होते ही वैश्विक रक्षा बाजार में एआई आधारित डिफेंस सॉफ्टवेयर और घातक स्वायत्त ड्रोन्स बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में अचानक तेजी देखी गई।

सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस विफलता के बाद अब वैश्विक युद्ध नीति पूरी तरह बदल जाएगी। भविष्य के युद्ध अब सैनिकों द्वारा नहीं, बल्कि एआई एल्गोरिदम और ड्रोन्स के झुंड (Drone Swarms) द्वारा लड़े जाएंगे। साइबर हमलों के जरिए दुश्मन के एआई रक्षा तंत्र को हैक करने या उसे भ्रमित करने की होड़ मचेगी, जिससे युद्ध में गलतफहमी या तकनीकी खराबी के कारण अचानक बड़ा परमाणु संकट पैदा होने का जोखिम कई गुना बढ़ गया है।

भारतीय परिपेक्ष्य में, एआई हथियारों की यह अप्रतिबंधित रेस एक बहुत बड़ी सुरक्षा चुनौती प्रस्तुत करती है। भारत के दोनों पड़ोसी देश- चीन और पाकिस्तान- आक्रामक रूप से एआई आधारित सैन्य तकनीकों और चीनी स्वायत्त ड्रोन्स का परीक्षण कर रहे हैं। यदि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) या सीमाओं पर ऐसे हथियारों का जमावड़ा बढ़ता है, तो भारत की पारंपारिक सैन्य सुरक्षा तैयारियों के लिए भारी असंतुलन पैदा हो जाएगा।

भारत ने जिनेवा सम्मेलन में बहुत ही संतुलित रुख अपनाते हुए 'जिम्मेदार एआई उपयोग' (Responsible Use of AI in Military) की वकालत की है। भारत का मानना है कि एआई हथियारों के इस्तेमाल में अंतिम निर्णय हमेशा एक मानव कमांडर के हाथ में होना चाहिए। इसके साथ ही, भारत ने अपनी त्रि-सेवाओं (थल, नभ, जल) के लिए 'एआई इन डिफेंस' (AIDef) पहल के तहत अपनी स्वदेशी क्षमताएं विकसित करना तेजी से शुरू कर दिया है ताकि किसी भी डिजिटल या रोबोटिक हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।

निष्कर्ष यह है कि एआई हथियारों पर वैश्विक सहमति न बन पाना मानवता के लिए एक गंभीर चेतावनी है। प्रौद्योगिकी की इस अंधी दौड़ में युद्ध के नियम बदल रहे हैं। भारत को अपनी रक्षा अनुसंधान संस्थाओं (DRDO) और टेक स्टार्टअप्स के सहयोग से एआई संचालित रक्षा प्रणालियों को और अधिक आधुनिक बनाना होगा, ताकि भविष्य के इस 'डिजिटल वॉरफेयर' में देश की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित रहें।

#AIArmsRace #GenevaGeopolitics #AIinDefense #TechConflict #IndiaDefenseTech #AutonomousWeapons #GlobalSecurity #FutureWarfare