विज्ञान और तकनीक क्षेत्र के लिये 2025 एक विशेष वर्ष है। इस साल वह अब तक की अपनी प्रगति और गति आंकेगा और तद्नुरूप आगे के लक्ष्यपूर्ति की तैयारी भी करेगा। विज्ञान और तकनीक के लिये यह वर्ष आकलन, पूर्वाकलन, प्रदर्शन, विश्लेषण, शोध, विकास, आविष्कार, अन्वेषण, अनुप्रयोग, रणनीति निर्माण तथा अंतरराष्ट्रीय प्रयासों एवं संभावित राष्ट्रीय उपलब्धियों से परिपूर्ण रहने वाला है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, व्यवस्थाओं, बाज़ार का डिजिटलकरण, सेमीकंडक्टर, माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर, ब्लॉकचेन और कंप्यूटिंग लैंग्वेज, स्पेस, डिफेंस, रोबोटिक्स, अक्षय ऊर्जा, तकनीकी नवाचार तथा डेटा साइंस की उपलब्धियां खबरों में रहने वाली है। देश में तकनीक विकास का एक नजारा साल की शुरुआत में महाकुंभ के दौरान दिखेगा जब 13 जनवरी से 26 फरवरी के बीच लगने वाला दुनिया का सबसे बड़ा जमावड़ा बरास्ते तकनीक समूची दुनिया तक पहुंचेगा। 45 करोड़ से अधिक लोग मानवीय निगरानी के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जीपीएस और स्ट्रीमिंग तकनीक पर आधारित सर्विलांस का व्यावहारिक कमाल देखेंगे। शौचालयों में सफाई की रियल-टाइम मॉनिटरिंग से लेकर साधु संतों के लाइव कार्यक्रम और सेवाओं की तत्काल अपडेट्स के साथ मेले के कैंपों तक की थ्रीडी खबर रखने वाले, प्रशासन और जनता के बीच तेजी से संपर्क साधने में मददगार ऐप प्रयागराज में आध्यात्मिकता और तकनीकी आधुनिकता के अद्भुत संगम का दर्शन कराएंगे। आस्था में विज्ञान के दर्शन से ठीक पहले 11 और 12 जनवरी 2025 को सभी उम्र के लोगों में वैज्ञानिक जागरूकता और जिज्ञासा को बढ़ावा देने के लिए फर्ग्यूसन कॉलेज, पुणे में आयोजित भारत विज्ञान महोत्सव, विज्ञान में आस्था का दर्शन कराएगा। महोत्सव विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में काम करने वाले वैज्ञानिकों, उद्योगपतियों, सरकारी अधिकारियों, नीति निर्माताओं, आम जनता को एक साथ लाता है इसकी सफलता देश में वैज्ञानिक माहौल का बैरोमीटर होगा। ऐसे में इस साल यह देखना दिलचस्प होगा कि विज्ञान और तकनीक जिस रफ्तार से देश में जगह बनाएगी क्या समाज भी उसी अनुपात में अपनी तार्किक और वैज्ञानिक सोच तथा तकनीक समझ में उल्लेखनीय बढोतरी कर सकेगा?
आज तकनीक के तकरीबन सभी क्षेत्र में भारतीय नवप्रवर्तक उपस्थित हैं सो तकनीक नवाचार में इस साल आशातीत विकास दिखेगा। भारतीय नवाचार अर्थव्यवस्था 2014 में देश के सकल घरेलू उत्पाद की पांच प्रतिशत थी जो 2022 में दस प्रतिशत हुई और अब सरकारी उम्मीद 2025-2026 तक इसके 20 फीसद तक पहुंचने की है। सरकार के दावे के हिसाब से 2025 में जीडीपी 5,000 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी यानी तकनीक क्षेत्र कुल 1,000 अरब डॉलर का होन चाहिए। लगभग आठ प्रतिशत की दर से बढ रहे तकनीक और डिजिटल अर्थव्यवस्था क्षेत्र से इस साल यह उम्मीद थोड़ी अधिक तो है पर बेमानी नहीं। सभी जी-20 देशों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कौशल और प्रतिभा के मामले में शीर्ष पर पहुंचने वाला भारत इस साल इसके जरिये अपने सकल घरेलू उत्पाद में 500 अरब अमेरिकी डॉलर जोड़ेगा। भारत का एआई बाज़ार 35 प्रतिशत चक्रवृद्धि के सालाना दर से बढ़ रहा है। यदि इसके 2027 तक 17 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है तो उपरोक्त आकलन में दम नजर आता है। जनरेटिव एआई की बढत 28 फीसदी सालाना की दर से बढ़ने की उम्मीद है, 2030 तक भारतीय अर्थव्यवस्था में इसके 400 अरब डॉलर के योगदान के लक्ष्य की ओर का यह वर्ष प्रस्थान बिंदु बनेगा। देश डिजिटली स्किल्ड कर्मचारियों की आवश्यक संख्या में 9 गुना बढत आंक कर इस साल तत्संबंधी प्रयास करेगा। रक्षा सुरक्षा,बीमा, स्वास्थ्य, सेवा से लेकर शिक्षा, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, खुदरा, अवसंरचना, दूरसंचार तक, हर जगह काम आने वाले डेटा साइंस का क्षेत्र 2025 में नई रुझान के साथ सामने आयेगा। विगत वर्ष इस क्षेत्र में 60 अरब का निवेश हुआ था, इस साल 80 अरब डालर की उम्मीद का ठोस आधार डिजिटल बुनियादी ढाँचे के विस्तार से है। महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद इस बरस मुंबई, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु डेटा सेंटर विकास के मुख्य केंद्र बनकर उभरेंगे।
रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस तकनीक का उपयोग इस साल कई कमाल करेगा। देश में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज का उद्योग 20 प्रतिशत के चक्रवृद्धि विकास दर से इस साल सवा सौ अरब डालर पार कर जाए तो अचरज नहीं होगा। इस क्षेत्र में इस साल क्लाउड आर्किटेक्ट डिजाइन और ओरिजिनल डिजिटल कंटेंट, वेब एप्लिकेशन बनाने की क्षमता की मांग बढेगी। अभी के पच्चीस करोड़ 5जी उपयोगकर्ता 2025 के मार्च तक 30 करोड़ तक पहुंच जाएंगे। हालांकि बड़ी आबादी तक इसकी पहुंच नहीं हो पाएगी पर यह बढत 2025 के वित्तीय वर्ष में प्रति ग्राहक प्रति माह औसत इंटरनेट डेटा खपत को 20 जीबी से बढाकर 30 जीबी तक बढा देगा।
विगत कुछ वर्षों की तरह इस साल भी सर्वाधिक सुर्खियां इसरो ही बटोरेगा। वह 2025 में रेलवे, थल सेना, नौ सेना, संचार,इन फ्लाइट कनेक्टिविटी के अलावा गगनयान के साथ संपर्क बनाए रखने के लिए छह उपग्रहों के साथ कई सर्विलांस सेटेलाइट भी लांच करेगा। इसी साल मार्च में इसरो नासा के सहयोग से तकरीबन तीन टन वजनी निसार उपग्रह लॉन्च करेगा, तकनीकि वजहों से टलते जा रहे इस महत्वाकांक्षी प्रक्षेपण में सफलता विभिन्न कारणों से अंतरिक्ष के वैश्विक क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि होगी। इसी साल इसरो का लूनर फ्लाईबाई की योजना है जिसमें गगनयान मिशन के तहत चयनित अंतरिक्षयात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजेना और फिर उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना शामिल है। इसके अलावा इसरो इस साल चांद से नमूने लाने वाले चंद्रयान चार के मिशन में जी जान से लगेगा। 2025 के आखीर तक भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 13 अरब डॉलर तक पहुंचेगी तो वजह बनेंगे इस क्षेत्र में लगातार बढते स्टार्टाप और छोटे उपग्रहों के विनिर्माण तथा प्रक्षेपण सेवा की बढ़ती मांग। इसरो अगर अंतरिक्ष में तीन गगनॉट भेजेगा तो 2025 में ही डीप-सी मिशन के अंतर्गत पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय हिंद महासागर में 6,000 मीटर की गहराई तक तीन यात्रियों वाला पहला मानव मिशन भेजने को तैयार है।
2025 में 55 फीसद भारतीय ग्रेजुएट वैश्विक रोजगार के योग्य हो जायेंगे, इंजिनियरिंग के ऐसे छात्रों में पिछले साल के मुकाबले 5 फीसद की बढोतरी होगी और विज्ञान के ग्रेजुएट पिछली साल से 7 फीसद बढकर 58 प्रतिशत पर ऐसी क्षमता हासिल कर लेंगे। महाराष्ट्र,कर्नाटक और दिल्ली जैसे राज्य योग्य प्रतिभाओं के केंद्र बनेंगे।
मौलिक विज्ञान पर आधारित नई तकनीकों के विकास से नवाचार, विकास, और कौशल आधारित नौकरियां पैदा होने की संभावनाओं के बीच वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम के अनुसार दुनिया भर के नियोक्ता उम्मीद कर रहे हैं कि साल 2025 तक 2025 तक लाखों इंसानों की जगह मशीनें ले लेंगी ऐसे में कार्यबल में 16 फीसदी से लेकर 19 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है और भारत भी इससे प्रभावित होगा, इस बरस बेरोजगारी बेकाबू होगी। पर सबसे बड़ी और घातक आशंका इस क्षेत्र में जेनरेटिव एआई और अन्य तकनीक के जरिये डीपफेक की घटनाओं के बढने, ऑनलाइन भ्रामक सूचनाओं के माध्यम से सार्वजनिक धारणा, जन भावना को नकारात्मक तौर पर प्रभावित करने, सामाजिक स्थिरता और सामंजस्य को तकनीक के सहारे झूठ ,घृणा, भय एवं विनाशकारी पूर्वाग्रहों को फैलाने के लिए हथियार बनाने में बढोतरी की है। यदि समाज में बढते तकनीक विज्ञान के बरअक्स वैज्ञानिक चेतना नहीं बढती है, उनके तार्किक और विवेकशील व्यवहार में बढत नहीं दिखती है तो तमाम वैज्ञानिक और तकनीक विकास की खुशियों के बावजूद हमें इस साल चिंतित रहने के भी कुछ कारणों से दो चार होना पड़ सकता है।