तापमान बढ़ने से समुद्र में घटता ऑक्सीजन

श्रीराजेश

 |  02 Jan 2020 |   172
Culttoday

जलवायु परिवर्तन और पोषक तत्वों से पैदा होने वाले प्रदूषण की वजह से महासागरों में ऑक्सीजन घट रही है. इससे मछलियों की कई प्रजातियां ख़तरे में घिर गई हैं.प्रकृति के लिए काम करने वाले समूह 'आईयूसीएन' के एक गहन अध्ययन के जरिए ये जानकारी सामने आई है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि कई दशकों से इस बात की जानकारी है कि समुद्र में पोषक तत्व कम हो रहा है लेकिन अब जलवायु परिवर्तन की वजह से स्थिति लगातार ख़राब होती जा रही है.अध्ययन के जरिए जानकारी मिली है कि 1960 के दशक में महासागरों में 45 ऐसे स्थान थे, जहां ऑक्सीजन कम थी लेकिन अब इनकी संख्या बढ़कर 700 तक पहुंच गई है. शोधकर्ताओं का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण ट्यूना, मार्लिन और शार्क सहित कई प्रजातियों को खतरा है.

काफी समय से माना जाता है कि खेतों और कारखानों से नाइट्रोजन और फास्फोरस जैसे रसायनों के निकलने से महासागरों को खतरा रहता है और समुद्र में ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित होता है. तटों के करीब ये अभी भी ऑक्सीजन की मात्रा घटने का प्रमुख कारक है. लेकिन, हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन से खतरा बढ़ गया है.

अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड निकलने से जब तापमान बढ़ता है तो अधिकांश गर्मी समुद्र सोख लेता है. इसके कारण पानी गर्म होता है और ऑक्सीजन घटने लगती है. वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक साल 1960 से 2010 के बीच महासागरों में ऑक्सीजन की मात्रा दो फ़ीसदी घटी है.

ऑक्सीजन में कमी का ये वैश्विक औसत है और हो सकता है कि ये ज़्यादा न लगे लेकिन कुछ जगहों पर ऑक्सीजन की मात्रा में 40 फ़ीसद तक कमी आने की आशंका जाहिर की गई है.

ऑक्सीजन की मात्रा में थोड़ी भी कमी समुद्री जीवन पर बड़ा असर डाल सकती है. पानी में ऑक्सीजन की कमी होना जेलीफिश जैसी प्रजातियों के माकूल है लेकिन ट्यूना जैसी बड़ी और तेजी से तैरने वाली प्रजातियों के लिए ये स्थिति अच्छी नहीं है.

आईयूसीएन की मिन्ना एप्स ने कहा, "हम डी-ऑक्सीजनेशन के बारे में जानते हैं, लेकिन हमें इसके जलवायु परिवर्तन से संबंध के बारे में जानकारी नहीं थी और ये चिंता बढ़ाने वाली स्थिति है."

उन्होंने बताया, "बीते 50 सालों में ऑक्सीजन की मात्रा में चार गुना तक कमी आई है और अगर उत्सर्जन की मात्रा ख़ासी नियंत्रण में भी रहे तो भी महासागरों में ऑक्सीजन कम होती जाएगी."

ट्यूना, मार्लिन और कुछ शार्क जैसे प्रजाति ऑक्सीजन की कमी को लेकर विशेष रूप से संवदेनशील हैं और यह एक यह बुरी खबर है.

बड़ी मछलियों को अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है. शोधकर्ताओं के अनुसार, ये जीव समुद्रों के उथले स्थान पर आ रहे हैं जहां ऑक्सीजन की मात्रा अधिक है. हालांकि, यहां इनके पकड़े जाने का खतरा अधि​क रहता है. अगर दुनिया के देशों का उत्सर्जन पर रोक लगाने को लेकर मौजूदा रवैया बरकरार रहा तो साल 2100 तक महासागरों की ऑक्सीजन तीन से चार प्रति​शत तक घट सकती है. दुनिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में इसके बुरे असर की संभावना है. जैव विविधता में सबसे समृद्ध जलस्तर के ऊपरी 1,000 मीटर में बहुत नुकसान होने की आशंका है.


RECENT NEWS

डिजिटल कुरुक्षेत्र में भारत
संजय श्रीवास्तव |  02 Feb 2026  |  79
आवरणकथा- डूबते मेट्रोपोलिस
श्रीराजेश |  01 Dec 2025  |  151
तकनीक ही बनेगा तारनहार
संजय श्रीवास्तव |  02 Sep 2025  |  156
जलवायु शरणार्थीः अगला वैश्विक संकट
दिव्या पांचाल |  30 Jun 2025  |  176
आकाशगामी भारत
कल्ट करंट डेस्क |  30 Jun 2025  |  145
To contribute an article to CULT CURRENT or enquire about us, please write to cultcurrent@gmail.com . If you want to comment on an article, please post your comment on the relevant story page.
All content © Cult Current, unless otherwise noted or attributed. CULT CURRENT is published by the URJAS MEDIA VENTURE, this is registered under UDHYOG AADHAR-UDYAM-WB-14-0119166 (Govt. of India)