Cult Current ई-पत्रिका (फरवरी, 2025 ) : लोक बनाम सत्ताःकेन्या में लोकतंत्र की जंग

संदीप कुमार

 |  01 Feb 2025 |   25
Culttoday

केन्या में हाल के दिनों में राजनीतिक स्थिति ने एक चिंताजनक मोड़ लिया है। जब 2024 के जनरल जेड विरोध प्रदर्शन हुए, तब राष्ट्रपति विलियम रुटो के पास दो स्पष्ट विकल्प थे: वह या तो भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीर कदम उठाते हुए जनता की उम्मीदों पर खरा उतरते, या फिर पुराने काले दौर की तरह सत्ता में बने रहने के लिए हिंसा और दमन का सहारा लेते। दुर्भाग्य से, रुटो ने दूसरा रास्ता चुना और केन्या एक बार फिर से राजनीतिक हिंसा और दमन के दौर में प्रवेश कर चुका है।
दमन और गायब हो रही आवाज़ें
पिछले कुछ महीनों में केन्या में बड़ी संख्या में लोगों का अचानक गायब होना चिंता का विषय बन चुका है। ये अपहरण बिना किसी कानून या प्रक्रिया का पालन किए हो रहे हैं, और इसके पीछे सरकार का हाथ होने के संकेत मिल रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि रुटो सरकार, जो इन अपहरणों की जिम्मेदार मानी जा रही है, खुद इसकी जांच के आदेश देती रही है। यह एक प्रकार की ऑरवेलियन धोखाधड़ी है, जिसमें जनता से यह अपेक्षा की जाती है कि वे इसे अनदेखा कर दें, जबकि सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करती रहती है। राष्ट्रपति के नजदीकी लोगों पर भी इस दमन का असर दिखा है। उदाहरण के लिए, जब केन्या के अटॉर्नी जनरल जस्टिन मुतुरी के बेटे को भी गिरफ्तार कर लिया गया था, तब मुतुरी ने सीधे राष्ट्रपति से संपर्क किया, और उनके बेटे को तत्काल रिहा कर दिया गया। इस मामले में बोलने के कारण मुतुरी को रुटो के सहयोगियों से बार-बार आलोचना का सामना करना पड़ा। यह दर्शाता है कि सरकार का यह रवैया न केवल सामान्य नागरिकों के खिलाफ है, बल्कि सत्ता के नजदीकी लोग भी इससे अछूते नहीं हैं।
धोखे की राजनीति और लोकतांत्रिक दिखावा
राष्ट्रपति रुटो की सरकार, एक तरफ लोकतांत्रिक आदर्शों की बात करती है, तो दूसरी ओर अपने विरोधियों को दबाने के लिए हिंसा का सहारा लेती है। यह एक दोहरी राजनीति है, जहां रुटो ने तुर्की, युगांडा और रवांडा जैसे तानाशाही सरकारों से सहयोग बढ़ाया है और देश में विदेशी असंतुष्टों को गिरफ्तार कर या उन्हें निर्वासित करके अपनी सत्ता को और मजबूत किया है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने लोकतांत्रिक छवि को बनाए रखने के लिए रुटो, राष्ट्रीय सुरक्षा का बहाना बनाकर सत्ता में बने रहना चाहते हैं।
एक बड़े सवाल का सामना केन्या के लोग कर रहे हैं: जब राजनीतिक नेतृत्व खुले तौर पर सच्चाई को विकृत करने का प्रयास करता है, तब समाज कैसे प्रतिक्रिया करता है? राष्ट्रपति रुटो के इस रवैये ने न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान किया है, बल्कि लोगों में यह सवाल उठाया है कि क्या सरकार के खिलाफ विरोध करने का कोई अर्थ रह गया है? यह एक ऐसे समाज की तस्वीर पेश करता है जो अपने राजनीतिक वर्ग से विश्वास खो चुका है, लेकिन अपनी ताकत और बदलाव की क्षमता पर अब भी विश्वास करता है।
सच्चाई और विभाजन की राजनीति
केन्या के कैथोलिक बिशप सम्मेलन ने इस स्थिति को 'झूठ की संस्कृति' कहा है। उनका कहना है कि सरकार सच को अपने हिसाब से परिभाषित कर रही है, और सत्य केवल वही है जो सरकार कह रही है। यह एक गंभीर राजनीतिक समस्या है, जिसे न केवल केन्या में बल्कि दुनिया भर में उन देशों में देखा जा सकता है, जहां लोकतंत्र संकट में है। यह सवाल उठता है कि केन्या जैसी जगह में, जहां लोग परिवर्तन की उम्मीद रखते हैं, वहां सरकार के झूठों और हिंसा से कैसे निपटा जाएगा?
राष्ट्रपति रुटो की यह रणनीति यह दर्शाती है कि वे सत्ता को बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। उन्होंने लोगों को डराने और विभाजित करने के पुराने तरीकों का सहारा लिया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वे इस समय की युवा जनसंख्या की मांगों को कब तक अनदेखा कर सकेंगे। जिस प्रकार से सरकार विरोध को दबा रही है, वह एक खतरनाक संकेत है कि केन्या की राजनीति में और अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
भविष्य का संघर्ष और लोकतंत्र का भविष्य
राष्ट्रपति रुटो के नेतृत्व में केन्या का भविष्य अस्थिर दिख रहा है। सत्ता के लिए यह संघर्ष केवल केन्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया के उन अन्य लोकतांत्रिक देशों के लिए भी एक चेतावनी है, जहां सत्ता के भूखे नेता जनता की इच्छाओं और अधिकारों की अनदेखी कर रहे हैं। केन्या का यह राजनीतिक परिदृश्य न केवल देश की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि यह संकेत है कि वैश्विक लोकतंत्र भी ऐसे ही खतरों का सामना कर रहा है।
केन्या के लोगों के लिए अब सवाल यह है कि क्या वे इस राजनीतिक धोखाधड़ी को सहन करेंगे, या फिर वे बदलाव की अपनी इच्छाओं को फिर से केंद्र में लाकर सरकार को जवाबदेह बनाएंगे।
यह आलेख सीएफआर के ब्लॉग पर प्रकाशित मिशेल गेविन के आलेख 'अकाउंटेबिलिटी गॉन मिसिंग इन केन्या' पर आधारित है।
 


Browse By Tags

RECENT NEWS

क्या बन रहा है एक और नया एशियाई गुट?
जॉर्ज फ्रीडमैन |  01 Apr 2025  |  3
हार्ड स्टेट, सॉफ्ट स्टेट (आवरण कथा)
अशरफ जहांगीर काजी |  01 Apr 2025  |  12
समृद्धि की नई साझेदारी
अशोक सज्जनहार |  02 Mar 2025  |  35
To contribute an article to CULT CURRENT or enquire about us, please write to cultcurrent@gmail.com . If you want to comment on an article, please post your comment on the relevant story page.
All content © Cult Current, unless otherwise noted or attributed. CULT CURRENT is published by the URJAS MEDIA VENTURE, this is registered under UDHYOG AADHAR-UDYAM-WB-14-0119166 (Govt. of India)