Cult Current ई-पत्रिका (फरवरी, 2025 ) : इज़राइलः स्थायी जीत या अस्थायी राहत?
संदीप कुमार
| 01 Feb 2025 |
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साल 2023 में 7 अक्टूबर को इज़राइल और हमास के बीच युद्ध ने न केवल पश्चिम एशिया के राजनीतिक परिदृश्य को हिला दिया, बल्कि पूरे विश्व को शांति और सुरक्षा के संदर्भ में चिंतित कर दिया। इस युद्ध ने 15 महीनों के बाद कुछ शांतिपूर्ण समझौतों के साथ समाप्ति की ओर कदम बढ़ाए हैं, लेकिन इसके परिणामों को समझना अभी भी मुश्किल है। क्या इज़राइल ने वास्तव में अपनी सैन्य और रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा किया, या यह केवल एक अस्थायी सफलता है? इस प्रश्न का उत्तर केवल सैन्य दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि राजनीतिक, कूटनीतिक और मानवीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
विजय की परिभाषा और इज़राइल का उद्देश्य:
विजय की परिभाषा केवल सैन्य सफलता तक सीमित नहीं होती; इसमें रणनीतिक लक्ष्य की प्राप्ति, क्षेत्रीय स्थिरता, और लंबे समय तक शांति की उम्मीदें भी शामिल होती हैं। इज़राइल ने 7 अक्टूबर को शुरू हुए युद्ध में स्पष्ट रूप से कहा था कि उसका उद्देश्य 'हमास को नष्ट करना' है, जो एक आतंकवादी संगठन के रूप में ग़ज़ा पट्टी में शासन कर रहा था। हालांकि, इज़राइल की सेना ने हमास के उच्चतम नेताओं को मार डाला और उनके सैन्य ढांचे को तबाह कर दिया, लेकिन इस संगठन की ताकत और जड़ें इतनी गहरी हैं कि वह फिर से उभर आया।
हमास के सदस्य अपनी रणनीति में लचीले हैं, और उन्होंने भारी नुक्सान के बावजूद अपना नेटवर्क जारी रखा है। इज़राइल की सैन्य रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 17,000 हमास के सैन्य सदस्यों को मारा गया, लेकिन फिर भी संगठन अपनी ताकत बनाए हुए है, जिसका संकेत यह है कि पूरी तरह से हमास को नष्ट करना संभव नहीं था। युद्ध के बाद भी हमास के कई कार्यकर्ता ग़ज़ा में मौजूद हैं और इसकी जड़ें फिलिस्तीनी समाज में गहरी बसी हुई हैं।
इज़राइल की राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में सफलता:
इज़राइल का युद्ध में उद्देश्य सिर्फ हमास को नष्ट करना नहीं था, बल्कि अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करना था। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस युद्ध को राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से जीत के रूप में देखा और घोषणा की कि 'हमारी सेनाओं ने हमास को नष्ट कर दिया है और हमारे सभी युद्ध उद्देश्य पूरे हो गए हैं।' नेतन्याहू का यह बयान इस विचार को समर्थित करता है कि इज़राइल ने अपनी सैन्य ताकत का प्रभावी रूप से प्रदर्शन किया और अपनी सीमा के भीतर आने वाले खतरे को कम करने में सफलता प्राप्त की।
युद्ध के दौरान इज़राइल की सेनाओं ने कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिनमें हथियार भंडारण, रॉकेट लॉन्चिंग पैड, और अन्य रणनीतिक स्थल शामिल थे। इसके बावजूद, इज़राइल के पास यह सुनिश्चित करने की कोई योजना नहीं थी कि ग़ज़ा में स्थायी शांति स्थापित हो, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सैन्य कार्रवाई के परिणाम लंबे समय तक सुरक्षित नहीं हो सकते। इसके अलावा, यह ध्यान देने योग्य है कि इज़राइल ने युद्ध के दौरान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन ग़ज़ा के नागरिकों की भारी संख्या में हुई हानि ने मानवाधिकारों और युद्ध अपराधों के सवाल को जन्म दिया।
ग़ज़ा का संकट और मानवीय दृष्टिकोण:
ग़ज़ा में युद्ध के परिणामस्वरूप उत्पन्न हुआ मानवीय संकट इज़राइल की सैन्य सफलता को सवालों के घेरे में डालता है। लाखों लोग घर से बेघर हो गए और स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल हुआ। ग़ज़ा में लगभग 92% लोग विस्थापित हो गए, जिससे यह क्षेत्र भयंकर मानवीय संकट का सामना कर रहा है। युद्ध के दौरान दोनों पक्षों के बीच नागरिक हत्याएं, शरणार्थी संकट, और खाद्य सुरक्षा जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हुईं।
वर्तमान समय में, ग़ज़ा की हालत ऐसी है कि यहां के नागरिकों को जीवन की बुनियादी आवश्यकताओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अस्पतालों, स्कूलों और जल आपूर्ति प्रणाली का ढांचा टूट चुका है, जिससे ग़ज़ा में जीवन जीने की स्थिति और भी जटिल हो गई है। इज़राइल की सरकार ने यह दावा किया कि उसने नागरिकों के खिलाफ हिंसा को न्यूनतम किया, लेकिन युद्ध की हिंसा की वास्तविकता से इनकार करना असंभव है।
इरान और क्षेत्रीय शक्ति समीकरण:
इज़राइल के लिए एक और महत्वपूर्ण पहलू क्षेत्रीय शक्ति संतुलन है। इज़राइल और उसके सहयोगी देशों ने युद्ध के दौरान इरान के प्रभाव को कमजोर करने की कोशिश की। इज़राइल ने लेबनान में हिज़बुल्लाह और सीरिया में ईरानी सेना के ठिकानों पर हमले किए, जिससे इरान की सैन्य स्थिति में भी कुछ गिरावट आई। इसके अलावा, इज़राइल ने इरान के मिसाइल और रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया, जो एक बड़ी रणनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा सकता है।