Cult Current ई-पत्रिका आवरण कथा (फरवरी, 2025 ) : ट्रंप 2.0ः अफगान शरणार्थियों की टूटी उम्मीदें

संदीप कुमार

 |  01 Feb 2025 |   28
Culttoday

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक इंग्लिश स्कूल में पढ़ने वाले अफगान छात्र अपनी अमेरिकी पुनर्वास प्रक्रिया के रुकने की खबर सुनकर स्तब्ध हैं। पहले जो छात्र उत्साहित और आशान्वित थे, वे अब निराशा और गहरे अवसाद में डूबे हुए हैं। 20 वर्षीय शिक्षक सैयद हसीब उल्लाह, जो खुद अमेरिका में पुनर्वास के लिए आवेदन कर चुके हैं, कहते हैं, 'यह हमारे लिए एक भयावह क्षण था। हम तीन साल से इंतजार कर रहे हैं, और अब कोई उम्मीद नहीं बची है।' इन छात्रों और शिक्षकों ने अपने भविष्य की कई योजनाएं बनाई थीं, जो अब अधर में लटक गई हैं।
शरणार्थियों की कठिनाइयाँ
इस्लामाबाद के एक इंग्लिश स्कूल की छात्रा, जो अमेरिका में पढ़ाई करने की उम्मीद कर रही थी, समाचार सुनते ही रो पड़ी। अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के कारण उसे अपनी शिक्षा अधूरी छोड़नी पड़ी थी, और अब अमेरिकी वीजा प्रक्रिया के रुकने से उसकी उच्च शिक्षा की उम्मीदें भी समाप्त होती दिखाई दे रही हैं। पाकिस्तान में इन शरणार्थियों के लिए काम करने या औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने की कोई वैध व्यवस्था नहीं है, और अमेरिकी पुनर्वास ही उनका एकमात्र सहारा था।
सैकड़ों अफगानों की निराशा
पाकिस्तान में 10,000 से 15,000 अफगान शरणार्थी विशेष आव्रजन वीजा (SIV) या शरणार्थी पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इनमें से कई लोग तालिबान के अत्याचारों से बचने के लिए यहां आए थे, लेकिन अब वे भी अपनी सुरक्षा और भविष्य को लेकर असहाय महसूस कर रहे हैं। यह संकट 2023 में पाकिस्तान द्वारा अफगानों को निर्वासित करने के बाद और गंभीर हो गया, जब इस देश ने भी अपने आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों के चलते इन्हें स्वीकारने में असमर्थता जताई। इन शरणार्थियों में ऐसे भी लोग शामिल हैं जिन्होंने अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए हैं, जैसे अमेरिकी सैन्यकर्मियों के परिवार वाले और अमेरिकी परियोजनाओं में काम करने वाले विकास कार्यकर्ता।
विश्वासघात की भावना
57 वर्षीय फातिमा, जो दशकों तक महिलाओं के अधिकारों और विकास के लिए काम करती रहीं, अब अमेरिका की वीजा प्रक्रिया के अचानक रुकने से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा, 'आपने हमें उस समय समर्थन दिया और हमें आगे बढ़ाया, इसलिए हमने आपके साथ काम किया। अब आप हमें ऐसे समय में पीछे छोड़ रहे हैं, जब हमें आपकी सबसे ज्यादा जरूरत है।' फातिमा अपनी 15 वर्षीय बेटी की शिक्षा को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित हैं, जो पिछले कई सालों से स्कूल से बाहर है। इसके अलावा, वह चाहती हैं कि उनकी 22 वर्षीय बेटी अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर सके।
संदेश का असर
ट्रंप के इस आदेश ने न केवल शरणार्थियों के मनोबल पर गहरा आघात किया है, बल्कि अमेरिकी नीतियों पर भी सवाल खड़े किए हैं। अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप और विकास परियोजनाओं पर अरबों डॉलर खर्च करने के बावजूद, अब उन लोगों की मदद करने में असमर्थता जताई जा रही है, जिन्होंने अमेरिकी बलों के साथ मिलकर काम किया और उनके हितों की रक्षा की। हसीब उल्लाह ने कहा, 'हमने आपकी मदद की, और अब हमें आपसे मदद की उम्मीद थी।'
अफगान शरणार्थियों की इस त्रासदी ने वैश्विक राजनीति में मानवाधिकार और नैतिक जिम्मेदारियों के सवालों को फिर से सामने ला दिया है। पाकिस्तान में रह रहे अफगान शरणार्थी न केवल आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, बल्कि अब वे अपने सुरक्षित भविष्य की आशाओं को भी खोते जा रहे हैं। अमेरिकी नीतियों के तहत उन्हें जिस सुरक्षा और पुनर्वास का आश्वासन दिया गया था, वह अब उनके लिए एक अधूरा सपना बन गया है।


Browse By Tags

RECENT NEWS

क्या बन रहा है एक और नया एशियाई गुट?
जॉर्ज फ्रीडमैन |  01 Apr 2025  |  3
हार्ड स्टेट, सॉफ्ट स्टेट (आवरण कथा)
अशरफ जहांगीर काजी |  01 Apr 2025  |  12
समृद्धि की नई साझेदारी
अशोक सज्जनहार |  02 Mar 2025  |  35
To contribute an article to CULT CURRENT or enquire about us, please write to cultcurrent@gmail.com . If you want to comment on an article, please post your comment on the relevant story page.
All content © Cult Current, unless otherwise noted or attributed. CULT CURRENT is published by the URJAS MEDIA VENTURE, this is registered under UDHYOG AADHAR-UDYAM-WB-14-0119166 (Govt. of India)