ढाका की नई राहः दिल्ली से दूरी, इस्लामाबाद से नज़दीकी

संदीप कुमार

 |  30 Jun 2025 |   218
Culttoday

पूर्व में युद्धरत रहे पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) की सेनाओं के बीच अब रक्षा सहयोग की संभावनाएँ उभर रही हैं। अंतरिम सरकार, जिसके प्रमुख चीफ एडवाइज़र मुहम्मद यूनुस हैं, बांग्लादेश की विदेश नीति को 1971 में मिली स्वतंत्रता के बाद की पारंपरिक पाकिस्तान-विरोधी सोच से अलग दिशा में ले जा रही है।
पिछले 55 वर्षों में ढाका ने अधिकांश समय इस्लामाबाद से दूरी बनाए रखी, सिवाय 2001–2006 के उस दौर के जब बीएनपी–जमात-ए-इस्लामी गठबंधन सत्ता में था। 2009 में जब अवामी लीग शेख हसीना के नेतृत्व में सत्ता में लौटी (जो बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की पुत्री हैं), तो उन्होंने पाकिस्तान के साथ न्यूनतम राजनयिक संबंध बनाए रखे। यह सिलसिला अगस्त 2024 तक चला, जब अवामी लीग सत्ता से बाहर हुई। इसके बाद, अंतरिम सरकार ने 'अवामी परंपराओं' से सायास दूरी बनाई और एक नई राष्ट्रीय पहचान की रूपरेखा गढ़ने का प्रयास शुरू किया।
आधिकारिक दौरों और सैन्य समीकरण
हाल के महीनों में पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच कई रक्षा संबंधी वार्ताओं और गतिविधियों ने रिश्तों में गर्मजोशी का संकेत दिया है:
जनवरी 2025: •    14 जनवरी: लेफ्टिनेंट जनरल एस.एम. कामरुल हसन के नेतृत्व में बांग्लादेश की सैन्य टीम ने रावलपिंडी में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल सैयद आसिम मुनिर और जनरल साहिर शमशाद मिर्ज़ा से मुलाकात की।
•15 जनवरी: ले. जनरल हसन ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान के वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ज़हीर अहमद बाबर सिद्धू से मुलाकात की। बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा, संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण और रक्षा व्यापार पर ज़ोर दिया गया।
जनवरी के अंत में: पाकिस्तान की ISI के डायरेक्टर जनरल मेजर जनरल शाहिद आमिर अफसर ने ढाका का दौरा किया — यह ISI और बांग्लादेश के बीच दशकों में पहला उच्च-स्तरीय संवाद था।
• फरवरी 2025: बांग्लादेश का युद्धपोत BNS समुद्र जॉय 'Aman 25' नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुआ, जो कराची के निकट अरब सागर में आयोजित किया गया था। इसमें चीन, म्यांमार और श्रीलंका समेत करीब 120 देशों ने हिस्सा लिया।
भाषण और रणनीतिक संकेत
अमन संवाद 2025 में बांग्लादेश के नौसेना प्रमुख एडमिरल मोहम्मद हसन ने कहा: 'ज़मीन हमें विभाजित करती है, लेकिन समुद्र जोड़ता है।'
यह बयान पाकिस्तान की सेना की 'भाई भाई' वाली भाषा से मेल खाता है, और एक नई सामरिक समझदारी की ओर संकेत करता है।
पाकिस्तान ने बांग्लादेश को सैन्य प्रशिक्षण देने की पेशकश की है। वहीं ढाका अपनी ‘Forces Goal 2030’ योजना के तहत JF 17 थंडर लड़ाकू विमान खरीदने में रुचि दिखा रहा है, जिसे पाकिस्तान और चीन ने मिलकर विकसित किया है। उल्लेखनीय है कि 2010–2020 के बीच चीन बांग्लादेश का और 2020–2024 में पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता रहा है।
परंपरागत रूप से ढाका संतुलित कूटनीति का पक्षधर रहा है — भारत और चीन दोनों के साथ रिश्ते बनाए रखकर। लेकिन अब नई सरकार ने नई दिल्ली से दूरी बना ली है, विशेषकर ज़िला-नरेशा विवाद और एयरबेस परियोजनाओं जैसे मुद्दों के बाद।
भारत के लिए संभावित चिंता
अगर पाकिस्तान का प्रभाव बांग्लादेश में बढ़ता है, तो यह भारत के लिए सुरक्षा चुनौती बन सकता है — विशेष रूप से पूर्वोत्तर, पश्चिम बंगाल और बंगाल की खाड़ी के संदर्भ में।
अप्रैल 2025 में हुए पालगाम आतंकी हमले में भारत ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया और 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम से जवाबी कार्रवाई की। इससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया।
हालांकि ढाका ने आतंकवाद के खिलाफ प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन कुछ विवादित टिप्पणियाँ, जैसे मेजर जनरल (रिटायर्ड) ए.एल.एम. फज़लुर रहमान का यह बयान कि 'अगर भारत पाकिस्तान पर हमला करे, तो बांग्लादेश को पूर्वोत्तर के सात राज्यों पर कब्ज़ा कर लेना चाहिए', क्षेत्रीय शांति के लिए चिंताजनक हैं। यद्यपि बांग्लादेश सरकार ने इन टिप्पणियों को खारिज किया, लेकिन उनके असर को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
इस बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ बांग्लादेश के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थे, जबकि विदेश मंत्री इशाक दार का दौरा स्थगित रहा।
नई राष्ट्रीय पहचान की कीमत
अंतरिम सरकार द्वारा 'हर ओर संवाद' की नीति अपनाना कूटनीतिक रूप से तार्किक लग सकता है, लेकिन दो महत्वपूर्ण प्रश्न उठते हैं:
क्या ढाका भू-राजनीतिक यथार्थ को नज़रअंदाज़ कर सकता है?
भारत बांग्लादेश का सबसे बड़ा पड़ोसी है। साझा नदियाँ, संस्कृति, व्यापार और सैन्य सहयोग (जैसे ‘समृति’ अभ्यास) दोनों देशों को जोड़ते हैं। इन संबंधों को कमज़ोर करना पूरे क्षेत्र में असंतुलन ला सकता है।
क्या एक गैर-निर्वाचित सरकार ऐसे दूरगामी निर्णय ले सकती है?
2011 में बांग्लादेश के संविधान में संशोधन कर 'कैरेटेकर सरकारों' को समाप्त किया गया था। हालांकि हालिया न्यायिक निर्णयों ने इसकी आंशिक वापसी की अनुमति दी है, लेकिन वर्तमान प्रशासन निर्वाचित नहीं है। ऐसे में इसके निर्णयों की वैधता लोकतांत्रिक दृष्टि से सवालों के घेरे में है।
निष्कर्ष
बांग्लादेश की सेना-केंद्रित विदेश नीति में यह नया मोड़ — पाकिस्तान और चीन के साथ बढ़ता सहयोग और भारत से बढ़ती दूरी — दक्षिण एशिया की सामरिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। यह अब भारत की प्रतिक्रियाओं और बांग्लादेश की आगामी निर्वाचित सरकार की दिशा पर निर्भर करेगा कि यह बदलती दोस्ती भविष्य में कैसी शक्ल लेती है। 

सोहिनी बोस, ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF), कोलकाता में स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ प्रोग्राम की एसोसिएट फेलो हैं। उनका शोध भारत के पूर्वी समुद्री पड़ोस,
गाल की खाड़ी और अंडमान सागर में कनेक्टिविटी, भू-राजनीति और सुरक्षा के विषयों पर केंद्रित है।


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