6 और 7 जुलाई 2025 को ब्राज़ील के रियो डी जनेरियो में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2025 में ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ हाल ही में शामिल हुए चार नए सदस्य—ईरान, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात—ने भाग लिया। यह सम्मेलन मुख्य रूप से वित्तीय सहयोग, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, वैश्विक संस्थाओं में सुधार, तकनीकी अवसंरचना में प्रगति और भूराजनीतिक समन्वय पर केंद्रित रहा।
साझा मुद्रा पर कार्य समूह
सम्मेलन का एक प्रमुख परिणाम यह रहा कि ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार के लिए एक संयुक्त मुद्रा की व्यवहार्यता की जांच हेतु एक औपचारिक कार्य समूह की स्थापना की गई। यह मुद्रा सदस्य देशों के भीतर कानूनी मुद्रा के रूप में नहीं, बल्कि व्यापार और निवेश लेन-देन में उपयोगी एक इकाई के रूप में कार्य करेगी। कार्य समूह 2026 के अंत तक अपनी पहली रिपोर्ट सौंपेगा। यह पहल अमेरिका डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए चल रहे प्रयासों का हिस्सा है।
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का रुझान
सम्मेलन में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 2024 में चीन और रूस के बीच 43.2% व्यापार युआन और रूबल में हुआ। भारत ने बताया कि 18% से अधिक रूसी तेल आयात का भुगतान रुपये, दिरहम या रूबल में किया गया। ब्राज़ील और चीन ने 2023 में हुए अपने समझौते को दोहराया जिसमें स्थानीय मुद्राओं में निपटान बढ़ाने पर सहमति हुई थी। शंघाई स्थित न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) ने बताया कि 2024 में उसके कुल ऋण का 31.2% स्थानीय मुद्राओं में जारी किया गया।
ऊर्जा और नवीकरणीय सहयोग
रूस और यूएई ने तेल और गैस लेन-देन को स्थानीय मुद्राओं में बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। चीन ने रूस और क़तर से युआन आधारित ऊर्जा आयात अनुबंधों को बढ़ाने की घोषणा की। ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका ने सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग का समझौता किया, जिसमें NDB से वित्तीय सहायता और चीनी सार्वजनिक उपक्रमों से तकनीकी सहयोग भी शामिल था।
डिजिटल ढांचे की दिशा में कदम
एक अलग सत्र में डिजिटल और तकनीकी सहयोग पर चर्चा हुई। चीन और रूस ने एक ब्रिक्स डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रखा जिसमें क्षेत्रीय डेटा केंद्र, साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल, और स्वतंत्र क्रॉस-बॉर्डर भुगतान प्रणाली शामिल हैं। यह ढांचा अमेरिकी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निर्भरता कम करने के दिशा-निर्देश भी प्रस्तुत करता है। इसके मूल्यांकन के लिए एक तकनीकी समिति 2025 की चौथी तिमाही में काम शुरू करेगी।
भारत और दक्षिण अफ्रीका ने डिजिटल पहचान, क्रॉस-बॉर्डर भुगतान प्लेटफॉर्म और फिनटेक विनियमन पर सहयोग को आगे बढ़ाने का समर्थन किया। प्रस्तावित BRICS Digital Architecture के अंतर्गत एक SWIFT के विकल्प की भी योजना है।
ब्रिक्स का विस्तार: नई ताकत
ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूइस इनासियो लूला डा सिल्वा ने नए सदस्यों को शामिल किए जाने को ब्रिक्स को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिनिधि बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। ईरान, मिस्र, इथियोपिया और यूएई के जुड़ने से यह समूह अब वैश्विक जनसंख्या का 46%, वैश्विक GDP का 31%, और वैश्विक तेल उत्पादन का 40% प्रतिनिधित्व करता है। 2024 में ब्रिक्स देशों के बीच कुल व्यापार $7.3 ट्रिलियन तक पहुंचा, जिसमें से 24.7% व्यापार स्थानीय मुद्राओं में हुआ—जो 2023 की तुलना में 6.4 प्रतिशत अंक की वृद्धि थी।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
ब्रिक्स सम्मेलन के समापन के तुरंत बाद, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स देशों से सभी आयातों पर 10% फ्लैट टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा। 7 जुलाई को पेंसिल्वेनिया में एक चुनावी रैली के दौरान उन्होंने इसे "अमेरिकी हितों पर समन्वित आर्थिक हमला" करार दिया। ट्रंप ने ईरान को ब्रिक्स में शामिल करने की आलोचना करते हुए इसे "अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए मंच" बताया और विशेषकर चीन और रूस को राज्य-प्रेरित आर्थिक आक्रामकता का दोषी ठहराया।
निष्कर्ष
ब्रिक्स 2025 शिखर सम्मेलन ने स्पष्ट रूप से यह दिखाया कि यह समूह पश्चिमी वित्तीय ढांचों पर निर्भरता कम करने, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने, और वैश्विक संस्थानों में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। सम्मेलन का समापन बहुपक्षीयता, आर्थिक समावेशिता और तकनीकी आत्मनिर्भरता के एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
धनिष्ठा डे कल्ट करंट की प्रशिक्षु पत्रकार है। आलेख में व्यक्त विचार उनके
निजी हैं और कल्ट करंट का इससे सहमत होना अनिवार्य नहीं है।