संवाद के साये में संदेह: भारत-चीन संबंधों की नाज़ुक पहल

संदीप कुमार

 |  11 Jul 2025 |   33
Culttoday

भारत और चीन आपसी हितों की संगति से प्रेरित होकर संबंधों में एक सतर्क सुधार की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन 2020 की गलवान झड़प और उसके बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चले चार वर्षों के तनाव की छाया अब भी इन संबंधों पर बनी हुई है।

27 जून 2025 को भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन से चिंगदाओ में मुलाकात की। भारत के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सिंह ने मौजूदा सीमा समझौतों को लागू करने पर ज़ोर दिया, विशेष रूप से अक्टूबर 2024 में तय किए गए विघटन ढांचे को। उन्होंने कहा कि भारत सीमा विवादों का “शांतिपूर्ण समाधान” चाहता है, लेकिन किसी भी प्रकार से "यथास्थिति को एकतरफा बदलने" के प्रयासों के प्रति चेतावनी भी दी, और भारत के क्षेत्रीय दावों को दोहराया।

जनवरी में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बीजिंग जाकर उपविदेश मंत्री सुन वेइडोंग से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने सीधी विमान सेवाओं की बहाली, वीजा प्रतिबंधों में ढील और अंतर्राष्ट्रीय नदियों पर जल-आँकड़ा साझेदारी को पुनः शुरू करने पर सहमति जताई।

जून 2025 में कैलाश मानसरोवर यात्रा की चार साल बाद बहाली को सद्भावना के संकेत के रूप में देखा गया। लगभग 40 भारतीय तीर्थयात्री नाथू ला मार्ग से तिब्बत में प्रवेश कर सके, जिसमें दोनों देशों की ओर से भारी लॉजिस्टिक व्यवस्था रही। यात्रा पहले LAC पर तनाव और COVID-19 महामारी के कारण रोक दी गई थी। चीन में भारत के पूर्व राजदूत अशोक कांठा ने वॉशिंगटन पोस्ट को बताया कि यह कदम प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे मूल विवादों के समाधान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

संवाद फिर से शुरू होने के बावजूद मूल मतभेद जस के तस हैं। अक्टूबर 2024 का गश्ती समझौता डेपसांग और डेमचोक जैसे क्षेत्रों में नियंत्रित गश्त को बहाल करता है, लेकिन कई विवादित बिंदु अब भी शेष हैं। स्वतंत्र रक्षा विशेषज्ञों की 2025 की शुरुआत की सैटेलाइट छवियाँ दर्शाती हैं कि भारत और चीन दोनों ने LAC के पास बंकर, हेलीपैड और सड़कों का निर्माण जारी रखा है। भारतीय सैन्य सूत्रों के अनुसार, पूर्वी लद्दाख में लगभग 50,000 सैनिक अब भी तैनात हैं, और चीनी पक्ष ने भी ऐसा ही रुख अपनाया है।

अरुणाचल प्रदेश अब भी विवाद का विषय बना हुआ है। मार्च में भारत ने तवांग के पास LAC के नज़दीक एक नई सड़क परियोजना की घोषणा की, जिस पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई और इस क्षेत्र को "दक्षिण तिब्बत" का हिस्सा बताया। भारत ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि यह क्षेत्र राष्ट्र का अभिन्न और अविच्छिन्न हिस्सा है।

आर्थिक स्तर पर दोनों देश परस्पर निर्भर हैं लेकिन सतर्क भी। 2024 में द्विपक्षीय व्यापार $118 अरब डॉलर पर रहा, जिसमें भारत को $70 अरब डॉलर से अधिक का घाटा हुआ। इसके चलते नई दिल्ली ने चीनी कंपनियों पर निगरानी कड़ी कर दी है। शाओमी और वीवो जैसी कंपनियाँ कर जांच के दायरे में हैं, जबकि भारत अब भी इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाओं और सौर ऊर्जा क्षेत्रों में चीनी आपूर्ति पर निर्भर है।

जुलाई की शुरुआत में, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के उस बयान पर चीन ने सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई जिसमें उन्होंने कहा था कि दलाई लामा के उत्तराधिकार की प्रक्रिया तिब्बती बौद्धों द्वारा संचालित की जानी चाहिए। नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए तिब्बत को अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बताया और वन-चाइना नीति का पालन करने की चेतावनी दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभी तक सितंबर में तियानजिन में होने वाले SCO राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन में भाग लेने की पुष्टि नहीं की है। ऐसा माना जा रहा है कि यह निर्णय LAC पर स्थिति की प्रगति पर निर्भर करेगा। इस बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर 13 जुलाई को होने वाली SCO विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए तियानजिन जाने की योजना में हैं, जहां वे अक्टूबर 2024 की रूपरेखा के कार्यान्वयन पर चर्चा करेंगे।

हालांकि भारत और चीन अब सीधे टकराव की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन संबंधों में सुधार अभी भी दूर की बात है—अविश्वास, अपूर्ण सीमा विवाद, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक नीतियों के चलते सुलह की राह कठिन बनी हुई है।

धनिष्ठा डे कल्ट करंट की प्रशिक्षु पत्रकार है। आलेख में व्यक्त विचार उनके
निजी हैं और कल्ट करंट का इससे सहमत होना अनिवार्य नहीं है।


Browse By Tags

RECENT NEWS

अफ्रीका में भारत का दांव
आकांक्षा शर्मा |  01 Aug 2025  |  20
युद्धोन्मादी ड्रैगन?
जलज श्रीवास्तव |  01 Aug 2025  |  18
BRICS बनाम डॉलर: नई वैश्विक जंग की दस्तक
श्रेया गुप्ता |  08 Jul 2025  |  30
गाजा की त्रासदी: खून, आंसू और उम्मीद
श्रेया गुप्ता |  04 Jul 2025  |  37
आवरण कथा- ट्रंपाघात
संजय श्रीवास्तव |  30 Jun 2025  |  44
निर्दयता की क़ीमत
कल्ट करंट डेस्क |  30 Jun 2025  |  30
टैरिफ की तकरार
कल्ट करंट डेस्क |  30 Jun 2025  |  38
सुरक्षा नहीं, सौदा: ट्रंप की नाटो नीति
कल्ट करंट डेस्क |  30 Jun 2025  |  32
ट्रम्प का अहंकार,धरती का संताप
कल्ट करंट डेस्क |  30 Jun 2025  |  37
To contribute an article to CULT CURRENT or enquire about us, please write to cultcurrent@gmail.com . If you want to comment on an article, please post your comment on the relevant story page.
All content © Cult Current, unless otherwise noted or attributed. CULT CURRENT is published by the URJAS MEDIA VENTURE, this is registered under UDHYOG AADHAR-UDYAM-WB-14-0119166 (Govt. of India)