अरबपति मस्क की बगावत या रूढ़िवाद की नई परिभाषा?

संदीप कुमार

 |  07 Jul 2025 |   201
Culttoday

दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति और तकनीक व राजनीति के प्रभावशाली चेहरे एलन मस्क ने 5 जुलाई 2025 को "अमेरिका पार्टी" के गठन की घोषणा की। यह घोषणा उस समय आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले 3.3 ट्रिलियन डॉलर के “वन बिग ब्यूटीफुल बिल” पर हस्ताक्षर किए — एक व्यापक टैक्स कट और खर्च योजना जिसे मस्क ने खुलकर आर्थिक रूप से गैर-जिम्मेदार बताया। ट्रंप के सबसे बड़े समर्थक के रूप में 2024 के चुनावों में मस्क की भूमिका निर्णायक थी, लेकिन अब यह रिश्ता टकराव में बदल गया है। मस्क का यह कदम न केवल एक व्यक्तिगत दूरी है, बल्कि अमेरिकी राजनीति की मौजूदा दो-दलीय व्यवस्था पर एक स्पष्ट सवाल भी खड़ा करता है। जैसे-जैसे 2026 के मिड-टर्म चुनाव करीब आते हैं, यह नई पार्टी अमेरिकी राजनीति में संभावित बदलाव की शुरुआत का संकेत देती है।

क्यों पैदा हुए मस्क और ट्रंप के बीच मतभेद?

 2024 में दोनों के रिश्ते को एक मज़बूत साझेदारी के रूप में देखा गया — मस्क ने लगभग 300 मिलियन डॉलर रिपब्लिकन अभियानों में लगाए और ट्रंप द्वारा स्थापित “डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE)” का नेतृत्व किया। लेकिन यह समीकरण तब बिगड़ने लगा जब ट्रंप की नीतियां बढ़ते खर्च और घाटे की ओर मुड़ने लगीं। “वन बिग ब्यूटीफुल बिल” इसका चरम था — मस्क के मुताबिक यह बिल न केवल घाटा बढ़ाता है बल्कि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स जैसी हरित तकनीकों के लिए टैक्स छूट भी खत्म करता है। मस्क ने इसे “पागलपन” कहा और चेतावनी दी थी कि अगर यह पास हुआ, तो वे एक नई पार्टी बनाएंगे। ट्रंप के दस्तखत के अगले ही दिन मस्क ने अपना वादा निभा दिया।

क्या रही ट्रंप की प्रतिक्रिया?

उन्होंने मस्क की अमेरिका पार्टी को “मूर्खतापूर्ण” बताते हुए यह कहा कि यह पार्टी वोटर्स को भ्रमित करेगी और रिपब्लिकन वोट को बांटेगी। उन्होंने मस्क की कंपनियों — टेस्ला और स्पेसएक्स — को मिलने वाली सब्सिडी बंद करने की धमकी दी और उनकी नागरिकता पर भी सवाल उठाए। जवाब में मस्क ने ट्रंप पर दिखावा करने और आर्थिक अनुशासन छोड़ने का आरोप लगाया। अब यह लड़ाई केवल नीति तक सीमित नहीं रही — यह व्यक्तिगत और वैचारिक दोनों स्तरों पर गहरी हो गई है।

क्या है मस्क की पार्टी का मकसद?  

यह पारंपरिक तीसरी पार्टी जैसा व्यापक चुनावी प्रयास नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक दांव है। मस्क का फोकस 2026 के चुनावों में 2–3 सीनेट और 8–10 हाउस सीटों पर है, जहां उनकी पार्टी बैलेंस ऑफ पावर बना सके। हाल ही में पास हुए बिल को हाउस में केवल 4 वोटों से और सीनेट में उपराष्ट्रपति की टाई-ब्रेकिंग वोट से मंज़ूरी मिली थी — यानी हर सीट मायने रखती है। क्या मस्क इस स्थिति का फायदा उठा सकते हैं? शुरुआती पोल बताते हैं कि 40% वोटर्स एक नई पार्टी को लेकर उत्साहित हैं, लेकिन क्या यह डिजिटल समर्थन असल वोट में बदलेगा — यह अभी स्पष्ट नहीं।

क्या यह अमेरिकी कंजरवेटिव राजनीति में बदलाव का संकेत है?

बिल्कुल। ट्रंप के नेतृत्व में रिपब्लिकन पार्टी ने 2016 से लोकलुभावन और बड़े खर्च वाली नीतियों को अपनाया है, जबकि मस्क एक नई दिशा दिखा रहे हैं — जहां तकनीकी नवाचार, सीमित सरकार और वित्तीय अनुशासन प्राथमिकता है। उनका दावा है कि वे “बीच के 80%” अमेरिकियों की आवाज़ बनना चाहते हैं — वे जो न तो ट्रंपवाद से जुड़ते हैं और न ही डेमोक्रेटिक वाम से। अमेरिका पार्टी इसी विचार के तहत खड़ी हो रही है।

क्या सफल हो सकते हैं मस्क?

अमेरिका में तीसरी पार्टियों का इतिहास चुनौतीपूर्ण रहा है। भले ही मस्क के पास धन और सोशल मीडिया प्रभाव हो, लेकिन उनकी छवि ध्रुवीकृत करने वाली है। उनकी राजनीति में बार-बार की गई भूमिकाएं — पहले डेमोक्रेट, फिर रिपब्लिकन और अब स्वतंत्र — जनता के भरोसे पर असर डाल सकती हैं। फिर भी, यह साफ है कि उन्होंने एक बड़ी चर्चा को जन्म दिया है। क्या अमेरिका पार्टी एक अस्थायी विरोध होगी या अमेरिकी राजनीति की दिशा को बदलने वाली ताकत? इसका उत्तर 2026 के चुनाव तय करेंगे।

रिया गोयल कल्ट करंट की प्रशिक्षु पत्रकार है। आलेख में व्यक्त विचार उनके
निजी हैं और कल्ट करंट का इससे सहमत होना अनिवार्य नहीं है।


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