प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 जुलाई 2025 को नामीबिया की राजधानी विंडहोक पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। वे 27 वर्षों में नामीबिया का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने—1990 और 1998 की दो पूर्व यात्राओं के बाद यह अब तक की केवल तीसरी उच्चस्तरीय भारतीय यात्रा है। आगमन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ‘हीरोज एकर’ पर श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें 21 तोपों की सलामी के साथ औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
इस अवसर पर उन्हें नामीबिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान—‘ऑर्डर ऑफ द मोस्ट एंशिएंट वेल्विट्शिया मिराबिलिस’—से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत-नामीबिया संबंधों को सुदृढ़ करने में उनके योगदान की स्वीकृति स्वरूप प्रदान किया गया। दौरे के दौरान स्वास्थ्य एवं औषधि में सहयोग, उद्यमिता विकास केंद्र की स्थापना तथा नामीबिया का दो भारतीय वैश्विक पहलों—डिजास्टर रेज़िलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर गठबंधन (CDRI) और ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस—में शामिल होना जैसे चार महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) वर्ष 2025 के अंत तक नामीबिया में लागू कर दिया जाएगा। यह निर्णय NPCI इंटरनेशनल और बैंक ऑफ नामीबिया के बीच अप्रैल 2025 में हुए लाइसेंसिंग समझौते के आधार पर लिया गया है, जिससे UPI भारत के बाहर पहली बार पूर्ण डिजिटल भुगतान प्रणाली के रूप में कार्यान्वित होगा।
नामीबिया दुनिया के प्रमुख यूरेनियम उत्पादक देशों में से एक है, साथ ही वहां लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के भी प्रचुर भंडार हैं—जो भारत की स्वच्छ ऊर्जा और सेमीकंडक्टर रणनीति के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। भारतीय अधिकारियों ने पुष्टि की कि नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए ईंधन सुनिश्चित करने हेतु दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौतों पर बातचीत प्रारंभ हो गई है। नामीबिया के खनन एवं ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, भारत ने समुद्री हीरों (मरीन डायमंड्स) की प्रत्यक्ष खरीद में भी रुचि जताई है—जिनकी अनुमानित मात्रा 80 मिलियन कैरेट से अधिक है—जिससे एंटवर्प और दुबई जैसे मध्यस्थ बाजारों को बायपास कर दोनों देशों को अधिक प्रतिफल प्राप्त हो सकेगा।
भारत ने नामीबिया को भारतीय रक्षा उपकरणों और सिमुलेटर प्रशिक्षण प्रणालियों की खरीद के लिए एक ऋण रेखा (Line of Credit) की पेशकश की। दोनों देशों ने संयुक्त नौसैनिक अभ्यास और सैन्य कर्मियों के प्रशिक्षण की संभावना पर भी सहमति जताई, जिससे दक्षिण अटलांटिक क्षेत्र में भारत की समुद्री उपस्थिति सुदृढ़ होगी और इंडो-पैसिफिक नीति को बल मिलेगा।
2022 में आरंभ हुआ ‘प्रोजेक्ट चीता’ भी इस दौरे में चर्चा का विषय रहा। प्रारंभ में नामीबिया से आठ चीतों को मध्य प्रदेश स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में लाया गया था। आज वहां चीतों की संख्या 12 हो चुकी है, और दूसरे चरण को लेकर चर्चा प्रारंभ हो चुकी है।
नामीबिया के विदेश मंत्री पेया मुशेलेन्गा ने कहा कि उनका देश "आर्थिक और रणनीतिक साझेदारियों में विविधता" लाने के प्रयास में है, और भारत का दृष्टिकोण "स्फूर्तिदायक एवं व्यावहारिक" प्रतीत होता है। उन्होंने फार्मास्युटिकल्स, कृषि-प्रौद्योगिकी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में संयुक्त उपक्रम की संभावना को उजागर किया।
हालांकि, कार्यान्वयन एक चुनौती बना हुआ है। UPI, यूरेनियम आपूर्ति और रक्षा सहयोग से संबंधित समझौतों के विस्तृत क्रियान्वयन की प्रक्रिया अगले छह महीनों में पूरी की जाएगी। इसके लिए एक तकनीकी समिति गठित की जा रही है, और विंडहोक स्थित भारतीय दूतावास में राजनयिक कर्मचारियों की संख्या सितंबर 2025 तक बढ़ाई जाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा घाना, अर्जेंटीना, ब्राज़ील और त्रिनिदाद व टोबैगो सहित पांच देशों के दौरे का अंतिम चरण थी, जिसका समापन 10 जुलाई को नामीबिया से हुआ। प्रिटोरिया स्थित ग्लोबल डायलॉग संस्थान की प्रोफेसर सनूशा नायडू ने इस यात्रा को "गंभीर और भविष्यदृष्टि सम्पन्न" बताया। उन्होंने कहा, “भारत अब विकास का एक वैकल्पिक मॉडल प्रस्तुत कर रहा है, जिसे अफ्रीका के कई देश—विशेषकर फिनटेक, ऊर्जा और शिक्षा के क्षेत्र में—गंभीरता से अपनाने को तैयार हैं।”
धनिष्ठा डे कल्ट करंट की प्रशिक्षु पत्रकार है। आलेख में व्यक्त विचार उनके
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